महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ
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गुण हैं। ४. महत्, अहंकार, शब्दतन्मात्रा, स्पर्शतन्मात्रा, रूपतन्मात्रा, रसतन्मात्रा और गन्धतन्मात्रा-ये सात गुण बुद्धिके हैं।
१. श्रोत्र, त्वचा, नेत्र, रसना और घ्राण-इन पाँच इन्द्रियोंसहित छठा मन-ये मनके छः गुण हैं। २. आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी—ये आकाशके पाँच गुण हैं। ३. संशय, निश्चय, गर्व और स्मरण-ये बुद्धिके चार गुण हैं। ४. अप्रतिपत्ति, विप्रतिपत्ति और विपरीत प्रतिपत्ति-ये तीन गुण तमके हैं। ५. प्रवृत्ति तथा दुःख—ये दो गुण रजके हैं। ६. प्रकाश सत्त्वका एक प्रधान गुण है।