भारतकोश
महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व

Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,450 पृष्ठ

पृष्ठ 2238, कुल 2450 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2238

भगवान् नर और नारायण जब देवता और पितरोंकी पूजा समाप्त कर चुके, तब उन्होंने नारदजीको देखा और शास्त्रमें बतायी हुई विधिसे उनका पूजन किया ॥ २२ ॥

तद् दृष्ट्वा महदाश्चर्यमपूर्वं विधिविस्तरम् ।
उपोपविष्टः सुप्रीतो नारदो भगवानृषिः ॥ २३ ॥
उनके द्वारा शास्त्रविधिका यह अपूर्व विस्तार और अत्यन्त आश्चर्यजनक व्यवहार देखकर उनके पास ही बैठे हुए देवर्षि भगवान् नारद अत्यन्त प्रसन्न हुए ॥ २३ ॥

नारायणं संनिरीक्ष्य प्रसन्नेनान्तरात्मना ।
नमस्कृत्य महादेवमिदं वचनमब्रवीत् ॥ २४ ॥
प्रसन्न चित्तसे महादेव भगवान् नारायणकी ओर देखकर नारदजीने उन्हें नमस्कार किया और इस प्रकार कहा ॥ २४ ॥

नारद उवाच

वेदेषु सपुराणेषु साङ्गोपाङ्गेषु गीयसे ।
त्वमजः शाश्वतो धाता माताऽमृतमनुत्तमम् ॥ २५ ॥
नारदजी बोले— भगवान्! अंग और उपांगोंसहित सम्पूर्ण वेदों तथा पुराणोंमें आपकी ही महिमाका गान किया जाता है। आप अजन्मा, सनातन, सबके माता-पिता और सर्वोत्तम अमृतरूप हैं ॥ २५ ॥

प्रतिष्ठितं भूतभव्यं त्वयि सर्वमिदं जगत् ।
चत्वारो ह्याश्रमा देव सर्वे गार्हस्थ्यमूलकाः ॥ २६ ॥
यजन्ते त्वामहरहर्नानामूर्तिसमास्थितम् ।
देव! आपमें ही भूत, भविष्य और वर्तमानकालीन यह सम्पूर्ण जगत् प्रतिष्ठित है। गार्हस्थ्यमूलक चारों आश्रमोंके सब लोग नाना रूपोंमें स्थित हुए आपकी ही प्रतिदिन पूजा करते हैं ॥ २६ १/२ ॥

पिता माता च सर्वस्य जगतः शाश्वतो गुरुः ।
कं त्वद्य यजसे देवं पितरं कं न विद्महे ॥ २७ ॥
(कमर्चसि महाभाग तन्मे ब्रूहीह पृच्छतः ।)
आप ही सम्पूर्ण जगत्‌के माता, पिता और सनातन गुरु हैं, तो भी आज आप किस देवता और किस पितरकी पूजा करते हैं? यह मैं समझ नहीं पाया। अतः महाभाग! मैं आपसे पूछ रहा हूँ ‘मुझे बताइये कि आप किसकी पूजा करते हैं? ॥ २७ ॥

श्रीभगवानुवाच

अवाच्यमेतद् वक्तव्यमात्मगुह्यं सनातनम् ।
तव भक्तिमतो ब्रह्मन् वक्ष्यामि तु यथातथम् ॥ २८ ॥

महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व · पृष्ठ 2238, कुल 2450 में से · BharatKosha