महाभारत (खंड ५) - शान्ति पर्व
Mahabharata (Vol 5) - Shanti Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रभो! उनके सिवा पुरुवंशी विदूरथका भी एक पुत्र जीवित है, जिसे ऋक्षवान् पर्वतपर रीछोंने पालकर बड़ा किया है ।। ७५ १/२ ।।
तथानुकम्पमानेन यज्वनाथामितौजसा ।। ७६ ।।
पराशरेण दायादः सौदासस्याभिरक्षितः ।
सर्वकर्माणि कुरुते शूद्रवत् तस्य स द्विजः ।। ७७ ।।
सर्वकर्मेत्यभिख्यातः स मां रक्षतु पार्थिवः ।
इसी प्रकार अमित शक्तिशाली यज्ञपरायण महर्षि पराशरने दयावश सौदासके पुत्रकी जान बचायी है, वह राजकुमार द्विज होकर भी शूद्रोंके समान सब कर्म करता है; इसलिये 'सर्वकर्मा' नामसे विख्यात है। वह राजा होकर मेरी रक्षा करे ।। ७६-७७ १/२ ।।
शिबिपुत्रो महातेजा गोपतिर्नाम नामतः ।। ७८ ।।
वने संवर्धितो गोभिः सोऽभिरक्षतु मां मुने ।
राजा शिबिका एक महातेजस्वी पुत्र बचा हुआ है, जिसका नाम है गोपति। उसे वनमें गौओंने पाल-पोसकर बड़ा किया है। मुने! आपकी आज्ञा हो तो वही मेरी रक्षा करे ।। ७८ १/२ ।।
प्रतर्दनस्य पुत्रस्तु वत्सो नाम महाबलः ।। ७९ ।।
वत्सैः संवर्धितो गोष्ठे स मां रक्षतु पार्थिवः ।
प्रतर्दनका महाबली पुत्र वत्स भी राजा होकर मेरी रक्षा कर सकता है। उसे गोशालामें बछड़ोंने पाला था, इसलिये उसका नाम 'वत्स' हुआ है ।। ७९ १/२ ।।
दधिवाहनपौत्रस्तु पुत्रो दिविरथस्य च ।। ८० ।।
गुप्तः स गौतमेनासीद् गङ्गाकूलेऽभिरक्षितः ।
दधिवाहनका पौत्र और दिविरथका पुत्र भी गङ्गातटपर महर्षि गौतमके द्वारा सुरक्षित है ।। ८० १/२ ।।
बृहद्रथो महातेजा भूरिभूतिपरिष्कृतः ।। ८१ ।।
गोलाङ्गुलैर्महाभागो गृध्रकूटेऽभिरक्षितः ।
महातेजस्वी महा भाग बृहद्रथ महान् ऐश्वर्यसे सम्पन्न है। उसे गृध्रकूट पर्वतपर लंगूरोंने बचाया था ।। ८१ १/२ ।।
मरुत्तस्यान्ववाये च रक्षिताः क्षत्रियात्मजाः ।। ८२ ।।
मरुत्पतिसमा वीर्ये समुद्रेणाभिरक्षिताः ।
राजा मरुत्तके वंशमें भी कई क्षत्रिय बालक सुरक्षित हैं, जिनकी रक्षा समुद्रने की है। उन सबका पराक्रम देवराज इन्द्रके तुल्य है ।। ८२ १/२ ।।
एते क्षत्रियदायादास्तत्र तत्र परिश्रुताः ।। ८३ ।।
द्योकारहेमकारादिजातिं नित्यं समाश्रिताः ।