महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ
पृष्ठ 1267, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 1267
मृत्युको पाकर यमदण्डसे दण्डित हो चिरकालतक नरकमें निवास करते हैं। यदि मनुष्यजन्म धारण करते हैं तो वैसे ही कायर, नपुंसक और हिजड़े होते हैं ।। स्त्रीणामपि तथा देवि यथा पुंसां तु कर्मजम् । इति ते कथितं देवि भूयः श्रोतुं किमिच्छसि ।। देवि! जैसे पुरुषोंको कर्मजनित फल प्राप्त होता है, उसी प्रकार स्त्रियोंको भी अपने-अपने कर्मोंका फल भोगना पड़ता है। यह विषय मैंने तुम्हें बता दिया। अब और क्या सुनना चाहती हो? ।।
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)