भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1268, कुल 2566 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1268

⬅ विषय-सूची (TOC)

[उमा-महेश्वर-संवादमें कितने ही महत्त्वपूर्ण विषयोंका विवेचन]

उमोवाच

भगवन् देवदेवेश प्रमदा विधवा भृशम् ।

दृश्यन्ते मानुषे लोके सर्वकल्याणवर्जिताः ॥

केन कर्मविपाकेन तन्मे शंसितुमर्हसि ।

उमाने पूछा—भगवन्! देवदेवेश्वर! मनुष्यलोकमें बहुत-सी युवती स्त्रियाँ समस्त

कल्याणोंसे रहित विधवा दिखायी देती हैं। किस कर्मविपाकसे ऐसा होता है? यह मुझे

बताइये ।।

श्रीमहेश्वर उवाच

याः पुरा मनुजा देवि बुद्धिमोहसमन्विताः ।

कुटुम्बं तत्र वै पत्युर्नाशयन्ति वृथा तथा ॥

विषदाश्चाग्निदाश्चैव पतीन् प्रति सुनिर्दयाः ।

अन्यासां हि पतीन् यान्ति स्वपतीन् द्वेष्यकारणात् ॥

एवंयुक्तसमाचारा यमलोके सुदण्डिताः ॥

निरयस्थाश्चिरं कालं कथंचित् प्राप्य मानुषम् ॥

तत्र ता भोगरहिता विधवाश्च भवन्ति वै ॥

श्रीमहेश्वरने कहा—देवि! जो स्त्रियाँ पहले जन्ममें बुद्धिमें मोह छा जानेके कारण

पतिके कुटुम्बका व्यर्थ नाश करती हैं, विष देती, आग लगाती और पतियोंके प्रति अत्यन्त

निर्दय होती हैं, अपने पतियोंसे द्वेष रखनेके कारण दूसरी स्त्रियोंके पतियोंसे सम्बन्ध

स्थापित कर लेती हैं, ऐसे आचरणवाली नारियाँ यमलोकमें भलीभाँति दण्डित हो

चिरकालतक नरकमें पड़ी रहती हैं। फिर किसी तरह मनुष्य-योनि पाकर वे भोगरहित

विधवा हो जाती हैं ॥

उमोवाच

भगवन् देवदेवेश मानुषेष्वेव केचन ।

दासभूताः प्रदृश्यन्ते सर्वकर्मपरा भृशम् ॥

आघातभर्त्सनसहाः पीड्यमानाश्च सर्वशः ।

केन कर्मविपाकेन तन्मे शंसितुमर्हसि ॥

उमाने पूछा—भगवन्! देवदेवेश्वर! मनुष्योंमें ही कोई दासभावको प्राप्त दिखायी देते

हैं, जो सब प्रकारके कर्मोंमें सर्वथा संलग्न रहते हैं। वे पीटे जाते हैं, डाँट-फटकार सहते हैं

और सब तरहसे सताये जाते हैं। किस कर्मविपाकसे ऐसा होता है? यह मुझे बताइये ।।

श्रीमहेश्वर उवाच

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व · पृष्ठ 1268, कुल 2566 में से · BharatKosha