महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 1295, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंगतानां तु यमस्तेषामुत्तमानभिपूजयेत् । अभिसंगृह्य विधिवत् पृष्ट्वा स्वागतकौशलम् ॥ यमलोकमें गये हुए प्राणियोंमेंसे जो उत्तम होते हैं, उन्हें विधिपूर्वक अपनाकर स्वागतपूर्वक उनका कुशल-समाचार पूछकर यमराज उनकी पूजा करते हैं ॥ प्रस्तुत्य तत् कृतं तेषां लोकं संदिशते यमः । यमेनैवमनुज्ञाता यान्ति पश्चात् त्रिविष्टपम् ॥ उनके सत्कर्मोंकी भूरि-भूरि प्रशंसा करके यमराज उन्हें यह संदेश देते हैं कि ‘आपको अमुक पुण्य लोकमें जाना है।’ यमराजकी ऐसी आज्ञा पानेके पश्चात् वे स्वर्गलोकमें जाते हैं ॥ मध्यमानां यमस्तेषां श्रुत्वा कर्म यथातथम् । जायन्तां मानुषेष्वेव इति संदिशते च तान् ॥ मध्यम कोटिके पुरुषोंके कर्मोंका यथावत् वर्णन सुनकर यमराज उनके लिये यह आज्ञा देते हैं कि ‘ये लोग फिर मनुष्योंमें ही जन्म लें’ ॥ अधमान् पाशसंयुक्तान् यमो नावेक्षते गतान् । यमस्य पुरुषा घोराश्चण्डालसमदर्शनाः ॥ यातनाः प्रापयन्त्येताँल्लोकपालस्य शासनात् ॥ पाशोंमें बँधे हुए जो अधम कोटिके प्राणी आते हैं, यमराज उनकी ओर आँख उठाकर देखते तक नहीं हैं। चाण्डालके समान दिखायी देनेवाले भयंकर यमदूत ही लोकपाल यमकी आज्ञासे उन पापियोंको यातनाके स्थानोंमें ले जाते हैं ॥ भिन्दन्तश्च तुदन्तश्च प्रकर्षन्तो यतस्ततः । क्रोशन्तः पातयन्त्येतान् मिथो गर्तेष्ववाङ्मुखान् ॥ वे उन्हें विदीर्ण किये डालते हैं, भाँति-भाँतिकी पीड़ाएँ देते हैं, जहाँ-तहाँ घसीटकर ले जाते हैं तथा उन्हें कोसते हुए नीचे मुँह करके नरकके गड्ढोंमें गिरा देते हैं ॥ संयामिनयः शिलाश्चैषां पतन्ति शिरसि प्रिये । अयोमुखाः कङ्कबला भक्षयन्ति सुदारुणाः ॥ प्रिये! फिर उनके सिरपर ऊपरसे संयामिनी शिलाएँ गिरायी जाती हैं तथा लोहेकी-सी चोंचवाले अत्यन्त भयंकर कौए और बगुले उन्हें नोच खाते हैं ॥ असिपत्रवने घोरे चारयन्ति तथा परान् । तीक्ष्णदंष्ट्रास्तथा श्वानः कांश्चित् तत्र ह्यदन्ति वै ॥ दूसरे पापियोंको यमदूत घोर असिपत्रवनमें घुमाते हैं। वहाँ तीखी दाढ़ोंवाले कुत्ते कुछ पापियोंको काट खाते हैं ॥ तत्र वैतरणी नाम नदी ग्राहसमाकुला । दुष्प्रवेशा च घोरा च मूत्रशोणितवाहिनी ॥