भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1494, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1494

प्रभो! तदनन्तर महातेजस्वी नारदजीने आकर यह बात बतायी कि किस प्रकार महाभाग ब्राह्मणोंने अपने तेजसे कपोंका नाश किया है ॥ २० ॥

नारदस्य वचः श्रुत्वा प्रीताः सर्वे दिवौकसः ।
प्रशंसुर्द्विजांश्चापि ब्राह्मणांश्च यशस्विनः ॥ २१ ॥
नारदजीकी बात सुनकर सब देवता बड़े प्रसन्न हुए। उन्होंने द्विजों और यशस्वी ब्राह्मणोंकी भूरि-भूरि प्रशंसा की ॥ २१ ॥

तेषां तेजस्तथा वीर्यं देवानां ववृधे ततः ।
अवाप्नुवंश्चामरत्वं त्रिषु लोकेषु पूजितम् ॥ २२ ॥
तदनन्तर देवताओंके तेज और पराक्रमकी वृद्धि होने लगी। उन्होंने तीनों लोकोंमें सम्मानित होकर अमरत्व प्राप्त कर लिया ॥ २२ ॥

इत्युक्तवचनं वायुमर्जुनः प्रत्युवाच ह ।
प्रतिपूज्य महाबाहो यत् तच्छृणु युधिष्ठिर ॥ २३ ॥
महाबाहु युधिष्ठिर! जब वायुने इस प्रकार ब्राह्मणोंका महत्त्व बतलाया, तब कार्तवीर्य अर्जुनने उनके वचनोंकी प्रशंसा करके जो उत्तर दिया, उसे सुनो ॥ २३ ॥

अर्जुन उवाच

जीवाम्यहं ब्राह्मणार्थं सर्वथा सततं प्रभो ।
ब्रह्मण्यो ब्राह्मणेभ्यश्च प्रणमामि च नित्यशः ॥ २४ ॥
अर्जुन बोला— प्रभो! मैं सब प्रकारसे और सदा ब्राह्मणोंके लिये ही जीवन धारण करता हूँ, ब्राह्मणोंका भक्त हूँ और प्रतिदिन ब्राह्मणोंको प्रणाम करता हूँ ॥ २४ ॥

दत्तात्रेयप्रसादाच्च मया प्राप्तमिदं बलम् ।
लोके च परमा कीर्तिर्धर्मश्चाचरितो महान् ॥ २५ ॥
विप्रवर दत्तात्रेयजीकी कृपासे मुझे इस लोकमें महान् बल, उत्तम कीर्ति और महान् धर्मकी प्राप्ति हुई है ॥ २५ ॥

अहो ब्राह्मणकर्माणि मया मारुत तत्त्वतः ।
त्वया प्रोक्तानि कात्स्न्र्येन श्रुतानि प्रयतेन च ॥ २६ ॥
वायुदेव! बड़े हर्षकी बात है कि आपने मुझसे ब्राह्मणोंके अद्भुत कर्मोंका यथावत् वर्णन किया और मैंने ध्यान देकर उन सबको श्रवण किया है ॥ २६ ॥

वायुरुवाच

ब्राह्मणान् क्षात्रधर्मेण पालयस्वेन्द्रियाणि च ।
भृगुभ्यस्ते भयं घोरं तत् तु कालाद् भविष्यति ॥ २७ ॥
वायुने कहा— राजन्! तुम क्षत्रिय-धर्मके अनुसार ब्राह्मणोंकी रक्षा और इन्द्रियोंका संयम करो। तुम्हें भृगुवंशी ब्राह्मणोंसे घोर भय प्राप्त होनेवाला है; परंतु यह दीर्घकालके