महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५- चातुर्होम यज्ञका वर्णन २६- अन्तर्यामीकी प्रधानता २७- अध्यात्मविषयक महान् वनका वर्णन २८- ज्ञानी पुरुषकी स्थिति तथा अध्वर्यु और यतिका संवाद २९- परशुरामजीके द्वारा क्षत्रिय-कुलका संहार ३०- अलर्कके ध्यान-योगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना ३१- राजा अम्बरीषकी गायी हुई आध्यात्मिक स्वराज्यविषयक गाथा ३२- ब्राह्मण-रूपधारी धर्म और जनकका ममत्वत्याग विषयक संवाद ३३- ब्राह्मणका पत्नीके प्रति अपने ज्ञाननिष्ठ स्वरूपका परिचय देना ३४- भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा ब्राह्मण, ब्राह्मणी और क्षेत्रज्ञका रहस्य बतलाते हुए ब्राह्मण-गीताका उपसंहार ३५- श्रीकृष्णके द्वारा अर्जुनसे मोक्ष-धर्मका वर्णन—गुरु और शिष्यके संवादमें ब्रह्मा और महर्षियोंके प्रश्नोत्तर ३६- ब्रह्माजीके द्वारा तमोगुणका, उसके कार्यका और फलका वर्णन ३७- रजोगुणके कार्यका वर्णन और उसके जाननेका फल ३८- सत्त्वगुणके कार्यका वर्णन और उसके जाननेका फल ३९- सत्त्व आदि गुणोंका और प्रकृतिके नामोंका वर्णन ४०- महत्तत्त्वके नाम और परमात्मतत्त्वको जाननेकी महिमा ४१- अहंकारकी उत्पत्ति और उसके स्वरूपका वर्णन ४२- अहंकारसे पंच महाभूतों और इन्द्रियोंकी सृष्टि, अध्यात्म, अधिभूत और अधिदैवतका वर्णन तथा निवृत्तिमार्गका उपदेश ४३- चराचर प्राणियोंके अधिपतियोंका, धर्म आदिके लक्षणोंका और विषयोंकी अनुभूतिके साधनोंका वर्णन तथा क्षेत्रज्ञकी विलक्षणता ४४- सब पदार्थोंके आदि-अन्तका और ज्ञानकी नित्यताका वर्णन ४५- देहरूपी कालचक्रका तथा गृहस्थ और ब्राह्मणके धर्मका कथन ४६- ब्रह्मचारी, वानप्रस्थी और संन्यासीके धर्मका वर्णन ४७- मुक्तिके साधनोंका, देहरूपी वृक्षका तथा ज्ञान-खड्गसे उसे काटनेका वर्णन ४८- आत्मा और परमात्माके स्वरूपका विवेचन ४९- धर्मका निर्णय जाननेके लिये ऋषियोंका प्रश्न ५०- सत्त्व और पुरुषकी भिन्नता, बुद्धिमान्की प्रशंसा, पंचभूतोंके गुणोंका विस्तार और परमात्माकी श्रेष्ठताका वर्णन