भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

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पृष्ठ 1905

प्रस्थानके पूर्व उन्होंने पुत्रशोकसे व्याकुल राजा धृतराष्ट्र, गान्धारी देवी तथा

विशाललोचना कुन्तीसे आज्ञा ले ली थी ।। २३ ।।

मूले निक्षिप्य कौरव्यं युयुत्सुं धृतराष्ट्रजम् ।

सम्पूज्यमानाः पौरैश्च ब्राह्मणैश्च मनीषिभिः ।। २४ ।।

(प्रययुः पाण्डवा वीरा नियमस्थाः शुचिव्रताः ।)

अपने कुलके मूलभूत धृतराष्ट्र, गान्धारी और कुन्तीके समीप उनकी रक्षाके लिये

कुरुवंशी धृतराष्ट्रपुत्र युयुत्सुको नियुक्त करके मनीषी ब्राह्मणों और पुरवासियोंसे पूजित होते

हुए वीर पाण्डवोंने वहाँसे प्रस्थान किया। वे सब-के-सब उत्तम व्रतका पालन करते हुए

शौच, संतोष आदि नियमोंमें दृढ़तापूर्वक स्थित थे ।। २४ ।।

इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि द्रव्यानयनोपक्रमे

त्रिषष्टितमोऽध्यायः ।। ६३ ।।

इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें द्रव्य लानेका

उपक्रमविषयक तिरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ ।। ६३ ।।

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ८ १/३ श्लोक मिलाकर कुल ३२ १/३ श्लोक हैं)