भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 2021, कुल 2566 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2021

नैतदन्ये करिष्यन्ति भविष्या वसुधाधिपाः ।। २१ ।।
यत् त्वं कुरुकुलश्रेष्ठ दुष्करं कृतवानसि ।
'कुरुकुलश्रेष्ठ! आपने जो दुष्कर पराक्रम कर दिखाया है, उसे भविष्यमें होनेवाले दूसरे भूपाल नहीं कर सकेंगे' ।। २१ १/२ ।।

इत्येवं वदतां तेषां पुंसां कर्णसुखा गिरः ।। २२ ।।
शृण्वन् विवेश धर्मात्मा फाल्गुनो यज्ञसंस्तरम् ।
इस प्रकार कहते हुए लोगोंकी श्रवणसुखद बातें सुनते हुए धर्मात्मा अर्जुनने यज्ञमण्डपमें प्रवेश किया ।। २२ १/२ ।।

ततो राजा सहामात्यः कृष्णश्च यदुनन्दनः ।। २३ ।।
धृतराष्ट्रं पुरस्कृत्य तं प्रत्युद्ययुस्तदा ।
उस समय मन्त्रियोंसहित राजा युधिष्ठिर तथा यदुनन्दन श्रीकृष्ण धृतराष्ट्रको आगे करके उनकी अगवानीके लिये आगे बढ़ आये थे ।। २३ १/२ ।।

सोऽभिवाद्य पितुः पादौ धर्मराजस्य धीमतः ।। २४ ।।
भीमादींश्चापि सम्पूज्य पर्यष्वजत केशवम् ।
अर्जुनने पिता धृतराष्ट्र और बुद्धिमान् धर्मराज युधिष्ठिरके चरणोंमें प्रणाम करके भीमसेन आदिका भी पूजन किया और श्रीकृष्णको हृदयसे लगाया ।। २४ १/२ ।।

तैः समेत्यार्चितस्तांश्च प्रत्यर्च्यथ यथाविधि ।। २५ ।।
विशश्राम महाबाहुस्तीरं लब्ध्वेव पारगः ।
उन सबने मिलकर अर्जुनका बड़ा स्वागत-सत्कार किया। महाबाहु अर्जुनने भी उनका विधिपूर्वक आदर-सत्कार करके उसी तरह विश्राम किया, जैसे समुद्रके पार जानेकी इच्छावाला पुरुष किनारेपर पहुँचकर विश्राम करता है ।। २५ १/२ ।।

एतस्मिन्नेव काले तु स राजा बभ्रुवाहनः ।। २६ ।।
मातृभ्यां सहितो धीमान् कुरूनेव जगाम ह ।
इसी समय बुद्धिमान् राजा बभ्रुवाहन अपनी दोनों माताओंके साथ कुरुदेशमें जा पहुँचा ।। २६ १/२ ।।

तत्र वृद्धान् यथावत् स कुरूनन्यांश्च पार्थिवान् ।। २७ ।।
अभिवाद्य महबाहुस्तैश्चापि प्रतिनन्दितः ।
प्रविवेश पितामह्याः कुन्त्या भवनमुत्तमम् ।। २८ ।।
वहाँ पहुँचकर वह महाबाहु नरेश कुरुकुलके वृद्ध पुरुषों तथा अन्य राजाओंको विधिवत् प्रणाम करके स्वयं भी उनके द्वारा सत्कार पाकर बहुत प्रसन्न हुआ। इसके बाद वह अपनी पितामही कुन्तीके सुन्दर महलमें गया ।। २७-२८ ।।

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व · पृष्ठ 2021, कुल 2566 में से · BharatKosha