भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 2138, कुल 2566 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 2138

यावन्ति तस्य पत्राणि पुष्पाणि च फलानि च । तावद् वर्षसहस्राणि शक्रलोके महीयते ॥ दानमें दिये हुए उस वृक्षके जितने पत्ते, फूल और फल होते हैं, उतने ही हजार वर्षोंतक वह इन्द्रलोकमें महिमा पाता है ॥

शक्रलोकावतीर्णश्च मानुष्यं लोकमागतः । रथाश्वगजसम्पूर्णं पुरं राज्यं च रक्षति ॥ इन्द्रलोकसे उतरकर जब वह मनुष्यलोकमें आता है, तब रथ, घोड़े और हाथियोंसे पूर्ण नगरके राज्यकी रक्षा करता है ॥

स्थापयित्वा तु मद्भक्त्या यो मत्प्रतिकृतिं नरः । आलयं विधिवत् कृत्वा पूजाकर्म च कारयेत् । स्वयं वा पूजयेद् भक्त्या तस्य पुण्यफलं शृणु ॥ जो पुरुष भक्तिपूर्वक मन्दिर बनवाकर उसमें मेरी प्रतिमाकी विधिपूर्वक स्थापना करता है और दूसरेसे उसकी पूजा करवाता है या स्वयं भक्तिके साथ पूजा करता है, उसके पुण्यका फल सुनो ॥

अश्वमेधसहस्रस्य यत् पुण्यं समुदाहृतम् । तत् फलं समवाप्नोति मत्सालोक्यं प्रपद्यते । न जाने निर्गमं तस्य मम लोकाद् युधिष्ठिर ॥ एक हजार अश्वमेधयज्ञका जो पुण्य बताया गया है, उस फलको पाकर वह मेरे परमधामको पधारता है। युधिष्ठिर! मैं जानता हूँ, वह वहाँसे कभी लौटकर इस लोकमें नहीं आता ॥

देवालये विप्रगृहे गोवाटे चत्वरेऽपि वा । प्रज्वालयति यो दीपं तस्य पुण्यफलं शृणु ॥ जो मनुष्य देवमन्दिरमें, ब्राह्मणके घरमें, गोशालामें और चौराहेपर दीपक जलाता है, उसके पुण्यफलको सुनो ॥

आरुह्य काञ्चनं यानं द्योतयन् सर्वतो दिशम् । गच्छेदादित्यलोकं स सेव्यमानः सुरोत्तमैः ॥ वह सुवर्णमय विमानपर बैठकर सम्पूर्ण दिशाओंको देदीप्यमान करता हुआ सूर्यलोकको जाता है, उस समय श्रेष्ठ देवता उसकी सेवामें उपस्थित रहते हैं ॥

तत्र प्रकामं क्रीडित्वा वर्षकोटिं महातपाः । इह लोके भवेद् विप्रो वेदवेदाङ्गपारगः ॥ वह महातपस्वी पुरुष करोड़ों वर्षोंतक सूर्यलोकमें यथेष्ट विहार करनेके पश्चात् मर्त्यलोकमें आकर वेद-वेदांगोंमें पारंगत ब्राह्मण होता है ॥

करकां कर्णिकां वापि महद् वा जलभाजनम् ।

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व · पृष्ठ 2138, कुल 2566 में से · BharatKosha