भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 2242, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 2242

तथा प्रणम्य गोविन्दं तदाप्रभृति पाण्डवाः । कपिलाद्यानि दानानि ददुर्धर्मपरायणाः ॥ इस प्रकार भगवान् गोविन्दको प्रणाम करके जब पाण्डव घर लौटे, उस दिनसे सदा धर्ममें तत्पर रहकर कपिला आदि गौओंका दान करने लगे ॥ मधुसूदनवाक्यानि स्मृत्वा स्मृत्वा पुनः पुनः । मनसा पूजयामासुर्हृदयस्थानि पाण्डवाः ॥ वे सब पाण्डव भगवान् श्रीकृष्णके वचनोंको बारंबार याद करके और उनको हृदयमें धारण करके मन-ही-मन उनकी सराहना करते थे ॥ युधिष्ठिरस्तु धर्मात्मा हृदि कृत्वा जनार्दनम् । तद्भक्तस्तन्मना युक्तस्तद्याजी तत्परोऽभवत् ॥ धर्मात्मा युधिष्ठिर ध्यानद्वारा भगवान्‌को अपने हृदयमें विराजमान करके उन्हींके भजनमें लग गये, उन्हींका स्मरण करने लगे और योगयुक्त होकर भगवान्‌का यजन करते हुए उन्हींके परायण हो गये ॥

इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि नकुलोपाख्याने द्विनवतितमोऽध्यायः ॥ ९२ ॥ इस प्रकार श्रीमद्भारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें नकुलोपाख्यानविषयक बानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ९२ ॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके १२२० श्लोक मिलाकर कुल १२७३ श्लोक हैं)


॥ आश्वमेधिकपर्व सम्पूर्णम् ॥


अनुष्टुप्(अन्य बड़े छन्द)बड़े छन्दोंको ३२ अक्षरोंके अनुष्टुप् मानकर गिननेपरकुल योग
उत्तर भारतीय पाठसे लिये गये२७४७।।(१२२।।)१६८।≡२९१५।।।≡
दक्षिण भारतीय पाठसे लिये गये१२६५(२१)२८।।।≡१२९३।।।≡

आश्वमेधिकपर्वकी कुल श्लोकसंख्या—४२०९।।।≡