भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 2247, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 2247

सविशेषमवर्तन्त भीममेकं तदा विना ।
धर्मराजका यह सार्थक वचन सुनकर भीमसेनको छोड़ अन्य सभी भाई धृतराष्ट्रका विशेष आदर-सत्कार करते थे ॥
न हि तत् तस्य वीरस्य हृदयादपसर्पति ।
धृतराष्ट्रस्य दुर्बुद्ध्या यद् वृत्तं द्यूतकारितम् ।। २७ ।।
वीरवर भीमसेनके हृदयसे कभी भी यह बात दूर नहीं होती थी कि जूएके समय जो कुछ भी अनर्थ हुआ था, वह धृतराष्ट्रकी ही खोटी बुद्धिका परिणाम था ।।

इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि प्रथमोऽध्यायः ।। १ ।।
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें पहला अध्याय पूरा हुआ ।। १ ।।


१. 'अरा' नामक शस्त्रसे काटकर बनाये जानेके कारण साग-भाजी आदिको 'अरालु' कहते हैं। उसको सुन्दर रीतिसे तैयार करनेवाले रसोइये 'आरालिक' कहलाते हैं। २. दाल आदि बनानेवाले सामान्यतः सभी रसोइयोंको 'सूपकार' कहते हैं। ३. पीपल, सोंठ और चीनी मिलाकर मूँगका रसा तैयार करनेवाले रसोइये 'रागखाण्डविक' कहलाते हैं।