महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2558, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्राह्मणेन च राज्ञा च गर्भिण्या चैव योषिता ।। स्वर्गकामो लभेत् स्वर्गं जयकामो लभेज्जयम् । गर्भिणी लभते पुत्रं कन्यां वा बहुभागिनीम् ।। ‘जय’ नामक यह इतिहास मोक्षकी इच्छा रखनेवाले, ब्राह्मण, राजा और गर्भवती स्त्रियोंको तो अवश्य सुनना चाहिये। इसके सुननेसे स्वर्गकी इच्छा करनेवालेको स्वर्ग, जयकी इच्छावालेको जय और गर्भवती स्त्रीको पुत्र या बड़े भाग्यवाली कन्या प्राप्त होती है ।।
यो गोशतं कनकश्शृङ्गमयं ददाति विप्राय वेदविदुषे सुबहुश्रुताय । पुण्यां च भारतकथां सततं शृणोति तुल्यं फलं भवति तस्य च तस्य चैव ।। वेदको जाननेवाले बहुश्रुत ब्राह्मणको कोई सुवर्णसे मँढ़े सींगोंवाली सौ गौदान दे, और दूसरा कोई निरन्तर महाभारतकी कथा सुने तो इन दोनोंको समान फलकी प्राप्ति होती है ।।
कार्ष्णं वेदमिमं सर्वं शृणुयाद् यः समाहितः । ब्रह्महत्यादिपापानां कोटिस्तस्य विनश्यति ।। पुत्राः शुश्रूषवः सन्ति प्रेष्याश्च प्रियकारिणः । भरतानां महज्जन्म महाभारतमुच्यते ।। व्यासदेवरचित इस (पञ्चम) वेदरूप महाभारतका जो समाहितचित्तसे आद्योपान्त श्रवण करता है, उसके ब्रह्महत्या आदि करोड़ों पाप नष्ट हो जाते हैं। फिर, इस इतिहासको सुननेवाले पुत्र माता-पिताके सेवकोन्मुख, तथा सेवक अपने स्वामीका प्रिय कार्य करनेवाले बन जाते हैं। इसमें महान् भरतवंशियोंकी जीवन-कथाका वर्णन है, इससे भी इसको महाभारत कहते हैं ।।
देवा राजर्षयो ह्यात्र पुण्या ब्रह्मर्षयस्तथा । कीर्त्यन्ते धूतपाप्मानः कीर्त्यते केशवस्तथा ।। भगवांश्चापि देवेशो यत्र देवी च कीर्त्यते । अनेकजननो यत्र कार्तिकेयस्य सम्भवः ।। इस महाभारतमें पवित्र देवताओं, राजर्षियों और पुण्यस्वरूप ब्रह्मर्षियोंका वर्णन है; इसमें भगवान् केशवके चरित्रोंका कीर्तन है, इसमें भगवान् महादेव तथा देवी पार्वतीका वर्णन है। और इसमें अनेक माताओंवाले कार्तिकेयके जन्मका भी वर्णन है ।।
ब्राह्मणानां गवां चैव माहात्म्यं यत्र कीर्त्यते । सर्वं श्रुतिसमूहोऽयं श्रोतव्यो धर्मबुद्धिभिः ।। मुच्यते सर्वपापेभ्यो राहुणा चन्द्रमा यथा ।