भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 302, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 302

तब उस स्त्रीने कहा—‘भगवन्! देखिये, सूर्यका रूप संध्याकी लालीसे लाल हो गया है। इस समय आपके लिये कौन-सी वस्तु प्रस्तुत की जाय?’ ॥ १०२ ॥

स उवाच ततस्तां स्त्रीं स्नानोदकमिहानय । उपासिष्ये ततः संध्यां वाग्यतो नियतेन्द्रियः ॥ १०३ ॥

तब ऋषिने उस स्त्रीसे कहा—‘मेरे नहानेके लिये यहाँ जल ले आओ। स्नानके पश्चात् मैं मौन होकर इन्द्रियसयंमपूर्वक संध्योपासना करूँगा’ ॥ १०३ ॥

इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि अष्टावक्रदिक्संवादे एकोनविंशोऽध्यायः ॥ १९ ॥

इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें अष्टावक्र और उत्तर दिशाका संवादविषयक उन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ १९ ॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल १०५ श्लोक हैं)