महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनिष्पाप महाराज! उन्हीं और्वके पुत्र भृगुकुलनन्दन ऋचीक होंगे, जिनकी सेवामें सम्पूर्ण धनुर्वेद मूर्तिमान् होकर उपस्थित होगा ॥ ७ ॥
क्षत्रियाणामभावाय दैवयुक्तेन हेतुना ।
स तु तं प्रतिगृह्यैव पुत्रे संक्रामयिष्यति ॥ ८ ॥
जमदग्नौ महाभागे तपसा भावितात्मनि ।
स चापि भृगुशार्दूलस्तं वेदं धारयिष्यति ॥ ९ ॥
वे क्षत्रियोंका संहार करनेके लिये दैववश उस धनुर्वेदको ग्रहण करके तपस्यासे शुद्ध अन्तःकरणवाले अपने पुत्र महाभाग जमदग्निको उसकी शिक्षा देंगे। भृगुश्रेष्ठ जमदग्नि उस धनुर्वेदको धारण करेंगे ॥ ८-९ ॥
कुलात् तु तव धर्मात्मन् कन्यां सोऽधिगमिष्यति ।
उद्भावनार्थं भवतो वंशस्य नृपसत्तम ॥ १० ॥
धर्मात्मन्! नृपश्रेष्ठ! वे ऋचीक तुम्हारे कुलकी उन्नतिके लिये तुम्हारे वंशकी कन्याका पाणिग्रहण करेंगे ॥ १० ॥
गाधेर्दुहितरं प्राप्य पौत्रीं तव महातपाः ।
ब्राह्मणं क्षत्रधर्माणं पुत्रमुत्पादयिष्यति ॥ ११ ॥
तुम्हारी पौत्री एवं गाधिकी पुत्रीको पाकर महातपस्वी ऋचीक क्षत्रियधर्मवाले ब्राह्मणजातीय पुत्रको उत्पन्न करेंगे (अपनी पत्नीकी प्रार्थनासे ऋचीक क्षत्रियत्वको अपने पुत्रसे हटाकर भावी पौत्रमें स्थापित कर देंगे) ॥ ११ ॥
क्षत्रियं विप्रकर्माणं बृहस्पतिमिवौजसा ।
विश्वामित्रं तव कुले गाधेः पुत्रं सुधार्मिकम् ॥ १२ ॥
तपसा महता युक्तं प्रदास्यति महाद्युते ।
महान् तेजस्वी नरेश! वे ऋचीक मुनि तुम्हारे कुलमें राजा गाधिको एक महान् तपस्वी और परम धार्मिक पुत्र प्रदान करेंगे, जिसका नाम होगा विश्वामित्र। वह बृहस्पतिके समान तेजस्वी तथा ब्राह्मणोचित कर्म करनेवाला क्षत्रिय होगा ॥ १२ १/२ ॥
स्त्रियौ तु कारणं तत्र परिवर्ते भविष्यतः ॥ १३ ॥
पितामह्नियोगाद् वै नान्यथैतद् भविष्यति ।
ब्रह्माजीकी प्रेरणासे गाधिकी पत्नी और पुत्री—ये स्त्रियाँ इस महान् परिवर्तनमें कारण बनेंगी, यह अवश्यम्भावी है। इसे कोई पलट नहीं सकता ॥ १३ १/२ ॥
तृतीये पुरुषे तुभ्यं ब्राह्मणत्वमुपैष्यति ॥ १४ ॥
भविता त्वं च सम्बन्धी भृगूणां भावितात्मनाम् ।
तुमसे तीसरी पीढ़ीमें तुम्हें ब्राह्मणत्व प्राप्त हो जायगा और तुम शुद्ध अन्तःकरणवाले भृगुवंशियोंके सम्बन्धी होओगे ॥ १४ १/२ ॥