महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 690, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ें'जो उत्तम लक्षणोंसे युक्त कपिला गौको वस्त्र ओढ़ाकर बछड़ेसहित उसका दान करते हैं और उसके साथ दूध दुहनेके लिये एक काँस्यका पात्र भी देते हैं, वे इहलोक और परलोक दोनोंपर विजय पाते हैं ॥ १३ ॥
महर्षि वशिष्ठका राजा सौदाससे गौओंका माहात्म्य-कथन
युवानमिन्द्रियोपेतं शतेन शतयूथपम् ।
गवेन्द्रं ब्राह्मणेन्द्राय भूरिशृंगमलङ्कृतम् ॥ १४ ॥
वृषभं ये प्रयच्छन्ति श्रोत्रियाय परंतप ।
ऐश्वर्यं तेऽधिगच्छन्ति जायमानाः पुनः पुनः ॥ १५ ॥
'शत्रुओंको संताप देनेवाले नरेश! जो लोग जवान, सभी इन्द्रियोंसे सम्पन्न, सौ गायोंके यूथपति, बड़ी-बड़ी सींगोंवाले गवेन्द्र वृषभ (साँड़) को सुसज्जित करके सौ गायोंसहित उसे श्रोत्रिय ब्राह्मणको दान करते हैं, वे जब-जब इस संसारमें जन्म लेते हैं, तब-तब महान् ऐश्वर्यके भागी होते हैं ॥ १४-१५ ॥
नाकीर्तयित्वा गाः सुप्यात् तासां संस्मृत्य चोत्पतेत् ।
सायंप्रातर्नमस्येच्च गास्ततः पुष्टिमवाप्नुयात् ॥ १६ ॥