भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 736, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 736

तस्माद् वो भयहृद् देवाः समुत्पत्स्यति पावकिः ॥ १३ ॥
अग्निदेव उस समय छिपे हुए थे, इसलिये वह शाप उन्हें नहीं प्राप्त हुआ; अतः देवताओ! अग्निके जो पुत्र उत्पन्न होगा, वह तुमलोगोंका सारा भय हर लेगा ॥
अन्विष्यतां वै ज्वलनस्तथा चाद्य नियुज्यताम् ।
तारकस्य वधोपायः कथितो वै मयानघाः ॥ १४ ॥
तुमलोग अग्निदेवकी खोज करो और उन्हें आज ही इस कार्यमें नियुक्त करो। निष्पाप देवताओ! तारकासुरके वधका यह उपाय मैंने बता दिया ॥ १४ ॥
न हि तेजस्विनां शापास्तेजःसु प्रभवन्ति वै ।
बलान्यतिबलं प्राप्य दुर्बलानि भवन्ति वै ॥ १५ ॥
तेजस्वी पुरुषोंके शाप तेजस्वियोंपर अपना प्रभाव नहीं दिखाते। साधारण बली कितने ही क्यों न हों, अत्यन्त बलशालीको पाकर दुर्बल हो जाते हैं ॥ १५ ॥
हन्यादवध्यान् वरदानपि चैव तपस्विनः ।
संकल्पाभिरुचिः कामः सनातनतमोऽभवत् ॥ १६ ॥
तपस्वी पुरुषका जो काम है, वही संकल्प एवं अभिरुचिके नामसे प्रसिद्ध है। वह सनातन या चिरस्थायी होता है। वह वर देनेवाले अवध्य पुरुषोंका भी वध कर सकता है ॥ १६ ॥
जगत्पतिरनिर्देश्यः सर्वगः सर्वभावनः ।
हृच्छयः सर्वभूतानां ज्येष्ठो रुद्रादपि प्रभुः ॥ १७ ॥
अग्निदेव इस जगत्के पालक, अनिर्वचनीय, सर्वव्यापी, सबके उत्पादक, समस्त प्राणियोंके हृदयमें शयन करनेवाले, सर्वसमर्थ तथा रुद्रसे भी ज्येष्ठ हैं ॥
अन्विष्यतां स तु क्षिप्रं तेजोराशिर्हुताशनः ।
स वो मनोगतं कामं देवः सम्पादयिष्यति ॥ १८ ॥
तेजकी राशिभूत अग्निदेवका तुम सब लोग शीघ्र अन्वेषण करो। वे तुम्हारी मनोवांछित कामनाको पूर्ण करेंगे ॥
एतद् वाक्यमुपश्रुत्य ततो देवा महात्मनः ।
जग्मुः संसिद्धसंकल्पाः पर्यैषन्तो विभावसुम् ॥ १९ ॥
महात्मा ब्रह्माजीका यह कथन सुनकर सफलमनोरथ हुए देवता अग्निदेवका अन्वेषण करनेके लिये वहाँसे चले गये ॥ १९ ॥
ततस्त्रैलोक्यमृषयो व्यचिन्वन्त सुरैः सह ।
कांक्षन्तो दर्शनं बह्नेः सर्वे तद्गतमानसाः ॥ २० ॥
तब देवताओंसहित ऋषियोंने तीनों लोकोंमें अग्निकी खोज प्रारम्भ की। उन सबका मन उन्हींमें लगा था और वे—सभी अग्निदेवका दर्शन करना चाहते थे ॥ २० ॥
परेण तपसा युक्ताः श्रीमन्तो लोकविश्रुताः ।

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