भारतकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 760, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 760

राक्षसोंने सूअर और भैंसा—ये दो पशु उन्हें उपहाररूपमें दिये। गरुड़के भाई अरुणने अग्निके समान लाल वर्णवाला एक मुर्गा भेंट किया ॥ २२ ॥ चन्द्रमाः प्रददौ मेषमादित्यो रुचिरां प्रभाम् । गवां माता च गा देवी ददौ शतसहस्रशः ॥ २३ ॥ चन्द्रमाने भेंड़ा दिया, सूर्यने मनोहर कान्ति प्रदान की, गोमाता सुरभि देवीने एक लाख गौएँ प्रदान कीं ॥ छागमग्निर्गुणोपेतमिला पुष्पफलं बहु । सुधन्वा शकटं चैव रथं चामितकूबरम् ॥ २४ ॥ अग्निने गुणवान् बकरा, इलाने बहुतसे फल-फूल, सुधन्वाने छकड़ा और विशाल कूबरसे युक्त रथ दिये ॥ वरुणो वारुणान् दिव्यान् सगजान् प्रददौ शुभान् । सिंहान् सुरेन्द्रो व्याघ्रांश्च द्विपानन्यांश्च पक्षिणः ॥ २५ ॥ श्वापदांश्च बहून् घोरांश्छत्राणि विविधानि च । वरुणने वरुणलोकके अनेक सुन्दर एवं दिव्य हाथी दिये। देवराज इन्द्रने सिंह, व्याघ्र, हाथी, अन्यान्य पक्षी, बहुत-से भयानक हिंसक जीव तथा नाना प्रकारके छत्र भेंट किये ॥ २५ १/२ ॥ राक्षसासुरसंघाश्च अनुजग्मुस्तमीश्वरम् ॥ २६ ॥ वर्धमानं तु तं दृष्ट्वा प्रार्थयामास तारकः । उपायैर्बहुभिर्हन्तुं नाशकच्चापि तं विभुम् ॥ २७ ॥ राक्षसों और असुरोंका समुदाय उन शक्तिशाली कुमारके अनुगामी हो गये। उन्हें बढ़ते देख तारकासुरने युद्धके लिये ललकारा; परंतु अनेक उपाय करके भी वह उन प्रभावशाली कुमारको मारनेमें सफल न हो सका ॥ २६-२७ ॥ सैनापत्येन तं देवाः पूजयित्वा गुहालयम् । शशंसुर्विप्रकारं तं तस्मै तारककारितम् ॥ २८ ॥ देवताओंने गुहावासी कुमारकी पूजा करके उनका सेनापतिके पदपर अभिषेक किया और तारकासुरने देवताओंपर जो अत्याचार किया था, सो कह सुनाया ॥ स विवृद्धो महावीर्यो देवसेनापतिः प्रभुः । जघानामोघया शक्त्या दानवं तारकं गुहः ॥ २९ ॥ महापराक्रमी देवसेनापति प्रभु गुहने वृद्धिको प्राप्त होकर अपनी अमोघ शक्तिसे तारकासुरका वध कर डाला ॥ २९ ॥ तेन तस्मिन् कुमारेण क्रीडता निहतेऽसुरे । सुरेन्द्रः स्थापितो राज्ये देवानां पुनरीश्वरः ॥ ३० ॥