महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व
Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 768, कुल 2566 में से
संदर्भ में पढ़ेंचित्रामें श्राद्धका दान करनेवाले पुरुषको रूपवान् पुत्र प्राप्त होते हैं। स्वातीके योगमें पितरोंकी पूजा करनेवाला वाणिज्यसे जीवन-निर्वाह करता है ॥ ७ ॥
बहुपुत्रो विशाखासु पुत्रमीहन् भवेन्नरः ।
अनुराधासु कुर्वाणो राजचक्रं प्रवर्तयेत् ॥ ८ ॥
विशाखामें श्राद्ध करनेवाला मनुष्य यदि पुत्र चाहता हो तो बहुसंख्यक पुत्रोंसे सम्पन्न होता है। अनुराधामें श्राद्ध करनेवाला पुरुष दूसरे जन्ममें राजमण्डलका शासक होता है ॥ ८ ॥
आधिपत्यं व्रजेन्मर्त्यो ज्येष्ठायामपवर्जयन् ।
नरः कुरुकुलश्रेष्ठ ऋद्धो दमपुरःसरः ॥ ९ ॥
कुरुकुलश्रेष्ठ! ज्येष्ठा नक्षत्रमें इन्द्रियसंयमपूर्वक पिण्डदान करनेवाला मनुष्य समृद्धिशाली होता है और प्रभुत्व प्राप्त करता है ॥ ९ ॥
मूले त्वारोग्यमृच्छेत यशोऽऽषाढासु चोत्तमम् ।
उत्तरासु त्वषाढासु वीतशोकश्चरेन्महीम् ॥ १० ॥
मूलमें श्राद्ध करनेसे आरोग्यकी प्राप्ति होती है और पूर्वाषाढ़ामें उत्तम यशकी। उत्तराषाढ़ामें पितृयज्ञ करनेवाला पुरुष शोकशन्य होकर पृथ्वीपर विचरण करता है ॥ १० ॥
श्राद्धं त्वभिजिता कुर्वन् भिषक्सिद्धिमवाप्नुयात् ।
श्रवणेषु ददच्छ्राद्धं प्रेत्य गच्छेत् स सद्गतिम् ॥ ११ ॥
अभिजित् नक्षत्रमें श्राद्ध करनेवाला वैद्यविषयक सिद्धि पाता है। श्रवण नक्षत्रमें श्राद्धका दान देनेवाला मानव मृत्युके पश्चात् सद्गतिको प्राप्त होता है ॥ ११ ॥
राज्यभागी धनिष्ठायां भवेत् नियतं नरः ।
नक्षत्रे वारुणे कुर्वन् भिषक्सिद्धिमवाप्नुयात् ॥ १२ ॥
धनिष्ठामें श्राद्ध करनेवाला मनुष्य नियमपूर्वक राज्यका भागी होता है। वारुण नक्षत्र-शतभिषामें श्राद्ध करनेवाला पुरुष वैद्यविषयक सिद्धिको पाता है ॥ १२ ॥
पूर्वप्रोष्ठपदाः कुर्वन् बहून् विन्दत्यजाविकान् ।
उत्तरासु प्रकुर्वाणो विन्दते गाः सहस्रशः ॥ १३ ॥
पूर्वभाद्रपदामें श्राद्ध करनेवाला बहुत-से भेड़-बकरोंका लाभ लेता है और उत्तराभाद्रपदामें श्राद्ध करनेवाला सहस्रों गौएँ पाता है ॥ १३ ॥
बहुकुप्यकृतं वित्तं विन्दते रेवतीं श्रितः ।
अश्विनीष्वश्वान् विन्देत भरणीष्वायुरुत्तमम् ॥ १४ ॥
श्राद्धमें रेवतीका आश्रय लेनेवाला (अर्थात् रेवतीमें श्राद्ध करनेवाला) पुरुष सोने-चाँदीके सिवा अन्य नाना प्रकारके धन पाता है। अश्विनीमें श्राद्ध करनेसे घोड़ोंकी और भरणीमें श्राद्धका अनुष्ठान करनेसे उत्तम आयुकी प्राप्ति होती है ॥ १४ ॥