महानिर्वाण तन्त्र (हिन्दी अनुवाद सहित)
Mahanirvana Tantra with Hindi Translation
शिव-पार्वती संवाद द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर · कल्याण मन्दिर · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंइस तन्त्र के एक ऐसे संस्करण का प्रकाशन प्रारम्भ किया गया, जिसमें किन्हीं शङ्कराचार्य द्वारा आध्यात्मिक व्याख्या प्रस्तुत की गई थी। साथ ही वङ्गानुवाद भी दिया गया था। इसमें भारती और तर्कालङ्कार दोनों की टीका की आलोचना भी की गई थी, किन्तु यह संस्करण अपूर्ण ही छपा था क्योंकि उसमें छठे उल्लास के १५८ वें श्लोक तक का ही प्रकाशन हो पाया था। ४. जीवानन्द विद्यासागर ने भी मूल और संस्कृत टीका को प्रकाशित किया। ५. सन् १८९१ में 'वङ्गवासी' प्रेस कलकत्ता के श्री विहारीलाल सरकार ने इस तन्त्र को वङ्गानुवाद सहित प्रकाशित किया। ६. सन् १९०६ में श्री श्यामाचरण कविरत्न ने वङ्गानुवाद के साथ मूल मात्र प्रकाशित किया। ७. श्री आर० एम० चट्टोपाध्याय ने मूल मात्र का प्रकाशन किया। ८. श्री वेङ्कटेश्वर प्रेस बम्बई द्वारा पण्डित बलदेवप्रसाद मिश्र कृत भाषा-टीका सहित इस तन्त्र का प्रकाशन सन् १९०३ में किया गया। नवाँ संस्करण आर्थर एवेलॉन द्वारा सम्पादित माना जा सकता है। प्रस्तुत हिन्दी रूपान्तर 'महा-निर्वाण तन्त्र' का प्रस्तुत हिन्दी-रूपान्तर तैयार करने में हमने वङ्गवासी प्रेस कलकत्ता से श्री विहारीलाल सरकार द्वारा सन् १८९१ में प्रकाशित संस्करण को आधार-रूप में लिया है। इस संस्करण, पं० बलदेवप्रसाद मिश्र और आर्थर एवेलॉन द्वारा सम्पादित संस्करण में उल्लास तो समान ही हैं अर्थात् प्रत्येक में १४ उल्लास हैं, किन्तु कुछ उल्लासों की श्लोक-संख्या में अन्तर दृष्टिगत होता है- उल्लास 'मिश्र'-संस्करण 'सरकार'-संस्करण एवेलॉन-संस्करण १ ७४ ७४ ७२ २ ५४ ५४ ५४ ३ १५४ १५४ १५३ ४ १०९ १०९ १०६ ५ २१५ २१५ २१६ ६ १९९ २०० २०० ७ १११ १११ १११ ८ २८९ २८९ २८९ ९ २८३ २८३ २८४ १० २१२ २१२ २१२ ११ १७० १७० १७० १२ १२९ १२९ १२९ १३ ३१० ३१० ३१० १४ २११ २११ २११ (सात)