माण्डूक्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य व गौड़पादकारिका सहित)

माण्डूक्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य व गौड़पादकारिका सहित)
Mandukya Upanishad Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य / गौड़पादाचार्य द्वारा
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२७२ माण्डूक्योपनिषद् [ गौ० का०
डूबना-उछलनारूप मेरी व्यथाएँ शान्त हो गयीं और जिनके चरणोंका आश्रय लेनेवालोंके लिये श्रुतिज्ञान, उपशम और विनयकी प्राप्ति अमोघ एवं पहले ही होनेवाली है उन ( श्रीगुरुदेवके ) भवभयहारी परम पवित्र चरण-युगलोंको मैं सर्वतोभावसे नमस्कार करता हूँ ॥३॥
इति श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य शङ्करभगवतः कृतौ गौडपादीयागमशास्त्रविवरणेऽलातशान्त्याख्यं चतुर्थ प्रकरणम् ॥ ४ ॥
ॐ शान्तिः ! शान्तिः !! शान्तिः !!!