भारतकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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और माया से अजाद हो कर अमर-लोक चली जाती है। साहिब कहते हैं 'नाम पाय सत्य जो बीरा, संग रहूँ मैं दास कबीरा'। इसीलिए साहिब बार-बार सुचेत करते हैं कि मैं बढ़ई वश नहीं कहता।

“जो वस्तु मेरे पास है वह ब्रह्माण्ड में कहीं नहीं है।”

सतगुरु मारा तानि के, शब्द सुरंगे बान।
मेरा मारा फिर जिये, तो हाथ न गहुँ कमान ॥

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पूरे संसार में गुरु और सतगुरु को एक ही सत्ता पर
स्थापत कर एक ही बात बोला जा रहा है।
आओ गुरु और सतगुरु के रहस्य को जाने

<table border="1"> <thead> <tr> <th>“गुरु”</th> <th>“सतगुरु”</th> </tr> </thead> <tbody> <tr> <td> <ol style="list-style-type: none;"> <li>1. गुरु रास्ता बताने वाला है।</li> <li>2. गुरु का नाम लिखने, पढ़ने, बोलने और जपने में आता है।</li> <li>3. गुरु शास्त्रों की शक्शी देकर अपना तत्व स्थापत करता है।</li> <li>4. गुरु केवल काया-नाम का गयाता है।</li> <li>5. काया का नाम मुर्दा नाम है जो देही को दिया जाता है।</li> </ol> </td> <td> <ol style="list-style-type: none;"> <li>1. सतगुरु धुर पहुंचान वाला है।</li> <li>2. सतगुरु का नाम एक गुप्त पावर है जो जीवन भर आखरी सुआंस तक सेवक की सुरक्षा करती है यह गुप्त पावर जो लिखने पढ़ने बोलने में वही आता है।</li> <li>3. सतगुरु किसी शास्त्र का मुहताज नहीं है। वह अपने अनुभव से देखा हुआ तत्व स्थापत करता है।</li> <li>4. सतगुरु ही केवल विदेह-नाम का गयाता है।</li> <li>5. सतगुरु का नाम जिन्दा नाम है। जो सुरति को दिया जाता है।</li> </ol> </td> </tr> </tbody> </table>