मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए
Manhin Niranjan Sabai Nachaye
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
Devanagarihipublished120 पृष्ठ
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<thead>
<tr>
<th>“गुरु”</th>
<th>“सतगुरु”</th>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td>
<p>6. गुरु की पहुँच केवल दशम-द्वार तक है।</p>
<p>7. गुरु भक्ति केवल नाम-कमाई पर केंद्रित है।</p>
<p>8. गुरु भक्ति केवल सगुण-निगुण दायरे तक ही सीमित है।</p>
<p>9. गुरु तीन-लोक का गयाता है।</p>
<p>10. गुरु आत्मा का गयान नहीं दे सकता।</p>
<p>11. गुरु मुक्ति नहीं दे सकता।</p>
<p>12. गुरु मन-माया की सीमा में बँधा हुआ व्यक्तित्व है।</p>
<p>13. गुरु परमपुरुष का भेद नहीं जानता।</p>
<p>14. गुरु किसी भी जीव-आत्मा को भवसागर से पार करने की क्षमता नहीं रखता।</p>
<p>15. गुरु की पहुँच केवल निराकार सत्ता (काल निरंजन) तक ही है।</p>
<p>16. गुरु द्वारा बताए हुए सभी देशों अथवा धुनों का जिकर किया जा सकता है।</p>
</td>
<td>
<p>6. सतगुरु की पहुँच ग्यारहवें द्वार तक है।</p>
<p>7. सतगुरु भक्ति पूरी तरह गुरु ‘कृपा’ पर केंद्रित है।</p>
<p>8. सतगुरु भक्ति की सीमा अनन्त तक है, जो सगुण-निगुण से भी आगे है।</p>
<p>9. सतगुरु चौथे-लोक का गयाता है।</p>
<p>10. सतगुरु आत्मा का समर्पण गयान देता है।</p>
<p>11. सतगुरु ही केवल पूर्ण-मुक्ति का दाता है।</p>
<p>12. सतगुरु मन-माया की सीमा से ऊपर मुक्त एक अमर व्यक्ति तत्त्व है।</p>
<p>13. सतगुरु खुद परमपुरुष में मिला हुआ और उन्हीं का तदरूप है।</p>
<p>14. सतगुरु अपनी कृपा से किसी भी जीव-आत्मा को भवसागर से हमेशा के लिए पार करने की क्षमता रखता है।</p>
<p>15. सतगुरु की पहुँच सीधा परमपुरुष तक है।</p>
<p>16. सदगुरु के सार शब्द अथवा अमर लोक का खुलासा नहीं किया जा सकता।</p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>