भारतकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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दस अवतार ईसवरी माया, करता कै जिन पूजा।
कहै कबीर सुनो भाई साधो, उपजै खपै सो दूजा॥

जो जन्म लेता है और फिर मर जाता है, वो माया है; जो रक्षा करने वाला सच्चा साहिब है, उसकी मृत्यु नहीं होती है; वो इस संसार के आवागमन में नहीं आता। दुनिया ने अवतार को अपना सच्चा साहिब (परम-पुरुष) मान लिया। साहिब कह रहे हैं कि मत्स्य, कच्छप आदि अवतार धारण करने का मकसद ही क्या था! यानी सब उसके ही बच्चे थे तो कुछ के लिए रक्षक तो कुछ के लिए भक्षक क्यों बना, इसलिए कह रहे हैं कि उस साहिब ने संखासुर दैत्य को नहीं मारा, क्योंकि वो साहिब तो दयाल है, किसी से उनकी दुश्मनी नहीं है, सब आत्माएँ उसी की अंश हैं, फिर किसे मारेंगे, फिर किसे कष्ट देंगे!! यह मारना-काटना अच्छी बात नहीं है, क्रूरता है, हिंसात्मक कार्य है, इसलिए यह काम साहिब का नहीं है। वो साहिब बराह बनकर भी नहीं आया और न ही उसने धरती का बोझ ही उठाया। ये सब काम साहिब के नहीं हैं, पर दुनिया झूठे ही इसे साहिब के काम कहती है। फिर जो नरसिंह रूप में खंभा फोड़कर बाहर आए, सबने उसी को सच्चा साहिब मान लिया, पर हिरण्यकश्यप के पेट को नाखून से फाड़ने वाला भी साहिब नहीं था। फिर बावन रूप बनाकर जिसने राजा बलि से तीन पग धरती माँगी, वो भी साहिब नहीं था। वो साहिब किसी से कुछ नहीं माँगता। वो तो दाता है, माँगने वाला नहीं। इसलिए इन बातों पर विचार किये बिना सारा संसार भ्रमित हो गया, इन्हीं अवतारों को अपना सच्चा साहिब समझने लग गया। इस तरह उस निरंजन की माया ने सारे संसार को भ्रमित कर दिया। फिर वो परशुराम बनकर भी नहीं आया, क्षत्रियों को नहीं मारा। यह छल माया ने ही किया। सद्गुरु की भक्ति के रहस्य को जाने बिना लोगों ने अपना जीवन व्यर्थ कर दिया। आगे कह रहे हैं कि उस साहिब ने सीता से ब्याह नहीं किया। पिता पुत्री से विवाह कर ही कैसे सकता है! ना ही उसने समुद्र को पत्थरों से बाँधा। इसलिए वो मूर्ख है जो बिना

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