भारतकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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करनी है। चाहे कोई भक्त है या अभक्त, यह किसी को भी नहीं छोड़ता है, सबको खा जाता है। फिर वेद पता नहीं किसकी महिमा कह रहे हैं! लोग वेदों को तो पढ़ रहे हैं, पर इस रहस्य को नहीं समझ पा रहे हैं।

जेहि को भरोसा सोई चुरावै कहो तब कैसी बने।
सेवा करै जेहि पुरुष की सो भक्षण प्रति दिन करे ॥
जानी कै बूझो नहिं के तो कहो समुझाय हो।
आदि अंत सबै ग्रसै अस निरंजन राय हो ॥

जिसपर भरोसा किया जाए, वही चोरी कर ले तो कैसी बात है! इस तरह जीव जिस काल निरंजन की भक्ति कर रहे हैं, वो ही उन्हें अंतकाल में खा जाता है। प्रत्यक्ष जानकर भी लोग समझ नहीं पा रहे हैं। मैंने बड़ा समझाया कि निरंजन सबको खा जायेगा, पर कोई समझ नहीं पा रहा है।

काल सबन को खाय, हरि हर ब्रह्मा से बसै।
बाचै कौन उपाय, एक नाम जाने बिना ॥

हरि, हर, ब्रह्मा आदि को भी निरंजन नहीं छोड़ेगा। एक नाम के बिना कोई भी जीव बच नहीं सकता है।

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हरि हर ब्रह्मा को है नाऊँ। रजगुण व्यापि रहा सब ठाऊँ ॥
ब्रह्मा को पूजै संसारा। सो जिव होय न भव के पारा ॥