भारतकोश
मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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मन के 12 पंथ


कबीर पंथ की जितनी भी भक्तियाँ हैं, निरंजन के अधीन हैं। निरंजन को पराधीन किया साहिब ने तो प्रार्थना की, कहा कि धरती पर जाओगे तो यह चीज़ फैलाओगे। फिर तो सभी चले जायेंगे। फिर शब्द दिया है। धरती पर आत्माएँ रखनी हैं या नहीं?

जैसा कि पहले भी बताया कि कई बार निरंजन महाप्रलय भी करता है। पूरे ब्रह्माण्ड का नाश करता है। सभी ग्रह नक्षत्र को खत्म करके अपने में समाता है। पूरी आत्माओं को लेकर अमर-लोक के पास जाता है, परम-पुरुष को पुकार करता है, कहता है कि ये सारी आत्माएँ वापिस लो, मुझे नहीं बनानी है सृष्टि। वहाँ से आवाज़ आती है कि हे निरंजन, जाओ, दुबारा सृष्टि करो, तुमने वरदान पाया है, अब जाओ, फिर बनाओ।

कई बार सवाल उठता होगा कि इतनी मेहनत क्यों करनी है? पूरी दुनिया को साहिब मुक्ति दे सकते हैं। इसमें से उन्हें नहीं ले जाना है, जो दुनिया को पसन्द कर रहे हैं। निरंजन भी आखिर साहिब का ही तो बेटा है। निरंजन ने प्रश्न किया, कहा कि जो भी आपकी भक्ति में आ जायेगा, पार हो जायेगा। तो यह संसार खाली हो जायेगा। ले चलो फिर मुझे भी, खाली करो संसार। फिर कहा कि या जीवों को उलझन में रखो। तुम्हारे 12 पंथ मैं भी चलाऊँगा। साहिब ने कहा कि ठीक है। इसलिए उलझाव है।

<table><tbody><tr><td>द्वादश</td><td>पंथ</td><td>काल</td><td>परमाना।</td></tr><tr><td>भूले</td><td>जीव</td><td>न</td><td>पाय</td><td>ठिकाना॥</td></tr></tbody></table>

इनमें से कोई बीजक की बात करेगा, कोई आत्मा को ही