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मनहिं निरंजन सबै नचाए
Manhin Niranjan Sabai Nachaye
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
Devanagarihipublished120 पृष्ठ
पृष्ठ 119स्थायी लिंक
पुस्तक सूची
हिन्दी में
<table style="width: 100%; border-collapse: collapse;"> <tbody> <tr> <td style="width: 50%; vertical-align: top;"> 1. परा रहस्या<br> 2. मासिक पत्रिका सत्यकेतु<br> 3. पावन प्रार्थनाएँ<br> 4. सद्गुरु चालीसा<br> 5. वार्षिक डायरी<br> 6. सद्गुरु भक्ति<br> 7. कहाँ से तू आया और कहाँ<br> तुझे जाना रे?<br> 8. सत्संग सुधारस<br> 9. नाम अमृत सागर<br> 10. अमृत वाणी<br> 11. सद्गुरु नाम जहाज़ है<br> 12. चल हंसा सतलोक<br> 13. कोटि नाम संसार में तिनते<br> मुक्ति न होय<br> 14. मूल नाम गुप्त है, जाने बिरला<br> कोय<br> 15. गुरु सुमित्रै सो पार<br> 16. तीन लोक से न्यारा<br> 17. सेहत के लिए ज़रूरी </td> <td style="width: 50%; vertical-align: top;"> 18. सहजे सहज पाइये<br> 19. रोगों से छुटकारा<br> 20. सद्गुरु महिमा<br> 21. भक्ति के चोर<br> 22. अनुरागसागर वाणी<br> 23. भक्ति सागर<br> 24. हरि सेवा युग चार है, गुरु<br> सेवा पल एक<br> 25. सत्य नाम के सुमरते उबरे<br> पतित अनेक<br> 26. काग पलट हंसा कर दीना<br> 27. कस्तूरी कुण्डल बसै मृग<br> खोजे बन माहिं<br> 28. गुरु पारस गुरु परस है<br> 29. गुरु अमृत की खान<br> 30. शीश दिये जो गुरु मिले तो<br> भी सस्ता जान<br> 31. मूल सुरति<br> 32. भृंग मता होय जिहि पास,<br> सोई गुरु सत्य धर्मदासा </td> </tr> </tbody> </table>पृष्ठ 120स्थायी लिंक
- मैं कहता हूँ आँखिन देखी
- गुरु संजीवन नाम बतावे
- नाम बिना नर भटक मरे
- रोगों की पहचान
- यह संसार काल को देशा
- न्यारी भक्ति
- साहिब तेरी साहिबी सब
घट रही समय - जाप मरे अजपा मरे अनहद
भी मर जाए - आयुर्वेद का कमाल रोगों के
निदान में - सुरति समानी नाम में
- सबकी गठरी लाल है, कोई
नहीं कंगाल - निन्दक जीवे युगन युग
काम हमारा होय। - निराले सदगुरु
- कुँजड़ों की हाट में हीरे का
क्या मोल - जीवड़ा तू तो अमर लोक का
पड़ा काल बस आई हो - मुझे है काम 'सदगुरु से
जगत रूठे तो रूठन दे' - जेहि खोजत कल्पो भये
घटहि माहिं सो मूर - आत्म ज्ञान बिना नर भटके
- बिन सतगुरु बाँचे नहीं
कोटिन करे उपाय - अँधी सुरति नाम बिन जानो
- सत्यनाम निज औषधि
सदगुरु दर्ई बताय - सेहत संजीवनी
- भक्ति दान गुरु दीजिए
- मन पर जो सवार है ऐसा
ऐसा विरला कोई - सत्यनाम है सार बूझौ सन्त
विवेक करि - रोग निवारक
- मुक्ति भेद मैं कहौं विचारी
- "तेरा बैरी कोई नहीं
तेरा बैरी मन" - सुरति का खेल सारा है
- सार शब्द निहअक्षर सारा
- करूँ जगत से न्यार
- बिन सत्संग विवेक न होई
- सत्य नाम को जनि कर दूजा
देई बहा - सुरत कमल सदगुरु स्थाना
- मनहिं निरंजन सबै नचाए
- सत्यपुरुष को जानसी
तिसका सतगुरु नाम