संग्रह पर लौटें

मनहिं निरंजन सबै नचाए
Manhin Niranjan Sabai Nachaye
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
Devanagarihipublished120 पृष्ठ
पृष्ठ 120स्थायी लिंक
- मैं कहता हूँ आँखिन देखी
- गुरु संजीवन नाम बतावे
- नाम बिना नर भटक मरे
- रोगों की पहचान
- यह संसार काल को देशा
- न्यारी भक्ति
- साहिब तेरी साहिबी सब
घट रही समय - जाप मरे अजपा मरे अनहद
भी मर जाए - आयुर्वेद का कमाल रोगों के
निदान में - सुरति समानी नाम में
- सबकी गठरी लाल है, कोई
नहीं कंगाल - निन्दक जीवे युगन युग
काम हमारा होय। - निराले सदगुरु
- कुँजड़ों की हाट में हीरे का
क्या मोल - जीवड़ा तू तो अमर लोक का
पड़ा काल बस आई हो - मुझे है काम 'सदगुरु से
जगत रूठे तो रूठन दे' - जेहि खोजत कल्पो भये
घटहि माहिं सो मूर - आत्म ज्ञान बिना नर भटके
- बिन सतगुरु बाँचे नहीं
कोटिन करे उपाय - अँधी सुरति नाम बिन जानो
- सत्यनाम निज औषधि
सदगुरु दर्ई बताय - सेहत संजीवनी
- भक्ति दान गुरु दीजिए
- मन पर जो सवार है ऐसा
ऐसा विरला कोई - सत्यनाम है सार बूझौ सन्त
विवेक करि - रोग निवारक
- मुक्ति भेद मैं कहौं विचारी
- "तेरा बैरी कोई नहीं
तेरा बैरी मन" - सुरति का खेल सारा है
- सार शब्द निहअक्षर सारा
- करूँ जगत से न्यार
- बिन सत्संग विवेक न होई
- सत्य नाम को जनि कर दूजा
देई बहा - सुरत कमल सदगुरु स्थाना
- मनहिं निरंजन सबै नचाए
- सत्यपुरुष को जानसी
तिसका सतगुरु नाम