भारतकोश
मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

पृष्ठ 148, कुल 649 में से

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८ मनुस्मृति। जिस प्रकार वसन्त आदि ऋतु अपने स्वाभाविक चिह्नों को जैसे आम की मञ्जरी (बौर) धारण करते हैं, उसी प्रकार मनुष्य अपने अपने पूर्व कर्मों को प्राप्त होते हैं। परमात्मा ने लोक की वृद्धि के लिये, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र इन चार वर्णों को पैदा किया। इनमें विराट्‌रूप परमात्मा के मुख से ब्राह्मण, भुजा से क्षत्रिय, ऊरु से वैश्य और पैर से शूद्र उत्पन्न हुए। इस संसार के दो भाग करके एक पुरुष और दूसरा स्त्री बनाया।* स्त्रीभाग से विराट्‌पुरुष पैदा किया। उस विराट्‌पुरुषरूप प्रजापति ने तप करके जिस पुरुष को उत्पन्न किया वही मैं, सारे विश्व का बनानेवाला हूं-ऐसा आपलोग जानिये। मैंने प्रजासृष्टि की इच्छा से कठिन तप करके पहले दश महर्षियों को उत्पन्न किया। उनके नाम इस प्रकार हैं-मरीचि, अत्रि, अङ्गिरस, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, प्रचेतस, वशिष्ठ, भृगु और नारद ॥ ३०-३५ ॥ एते मनूंस्तु सप्तान्यानसृजन् भूरितेजसः । देवान् देवनिकायांश्च महर्षींश्चामितौजसः ॥ ३६ ॥ यक्षरक्षःपिशाचांश्च गन्धर्वाप्सरसोऽसुरान् । नागान्सर्पान्सुपर्णांश्च पितॄणां च पृथग्गणान् ॥ ३७ ॥ विद्युतोऽशनिमेघांश्च रोहितेन्द्रधनूंषि च । उल्कानिर्घातकेतूंश्च ज्योतींष्युच्चावचानि च ॥ ३८ ॥ किन्नरान्वानरान्मत्स्यान् विविधांश्च विहंगमान् । पशून्मृगान्मनुष्यांश्च व्यालांश्चोभयतोदतः ॥ ३९ ॥

  • शुक्लयजुर्वेदीय वाजसनेयीसंहिता के पुरुषसूक्त में लिखा है-'ब्राह्मणोऽस्य मुखमासीद्वाहू राजन्यः कृतः । ऊरू यदस्य तद्वैश्यः पद्भ्यां २४ शूद्रो अजायत ।' तैत्तिरीयब्राह्मण में लिखा हैः-'अथो अर्धो वै एष आत्मनो यत्पत्नी । अयज्ञो वै एष योऽपत्नीकः ।' ३ । ३ । ३ । ५ । शतपथब्राह्मण में, प्रजापति द्वारा सृष्टि- प्रक्रिया का विवरण विस्तारपूर्वक है । मनुकी सृष्टिप्रक्रिया उससे मिलती है ।
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