मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभूमिका । ६५ ‘ नान्द ’ की गणना नहीं की। देवीभागवत में ‘वायुपुराण ’ पुराणों में परिगणित है, परंतु सूतसंहिता आदि के अनुसार वायुपुराण न तो पुराणों में और न उपपुराणों में है। इसी प्रकार एक ‘ भागवत ’ की दशा है। विचार करने से उप- पुराणों की संख्या अष्टादशमात्र नहीं है इस कारण उक्त और तादृश अनुक्त उपपुराण ही हैं। और उपपुराणों के अन्तर्गत ‘नारदीय ’ तथा ‘ब्रह्माण्ड’ भिन्न हैं। उपपुराण पुराण ही से निकले हैं यह मात्स्यपुराण में लिखा है— ‘ पाद्मे पुराणे यत्प्रोक्तं नरसिंहोपवर्णनम् । तदष्टादशसाहस्रं नारसिंहमिहोच्यते ॥ नन्दाया यत्र माहात्म्यं कार्तिकेयेन वर्णितम् । नन्दापुराणं तल्लोके नन्दाख्यमिति कीर्तितम् ॥ यत्तु साम्बं पुरस्कृत्य भविष्येऽपि कथानकम् । प्रोच्यते तत्पुनर्लोके साम्बमेव मुनिव्रताः ॥ एवमादित्यसंज्ञं च तत्रैव परिगण्यते । अष्टादशभ्यस्तु पृथक् पुराणं यत्तु दृश्यते ॥ विजानीध्वं द्विजश्रेष्ठास्तदेतेभ्यो विनिर्गतम् ॥ ’ धर्मशास्त्र वा स्मृति । ४ । धर्मशास्त्र । ‘ श्रुतिस्तु वेदो विज्ञेयो धर्मशास्त्रं तु वै स्मृतिः ’ इस मनु वचन के अनुसार धर्मशास्त्र का दूसरा नाम स्मृति है। मनु आदि कई एक स्मृतियां अपने अपने कर्ता के नाम से प्रसिद्ध हैं। स्मृतियों के नामों का क्रम नियत नहीं है वह भिन्न भिन्न प्राप्त होता है। यहां पैठीनसि के वचनानुसार छत्तीस स्मृतियों का उल्लेख करते हैं- १. मनु, २ अङ्गिरा,