भारतकोश
मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

पृष्ठ 553, कुल 649 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 553

साक्षी में झूठ बोलकर, गुरुको झूठा दोष लगाकर, धरोहर मार कर और स्त्री वा मित्र का वध करके ब्रह्महत्या का प्रायश्चित्त करे। अज्ञान में द्विज का वध किया हो तो ये प्रायश्चित्त कहे हैं। परन्तु जानकर हत्या करने पर कोई प्रायश्चित्त नहीं है ॥८६-६०॥ सुरां पीत्वा द्विजो मोहादग्निवर्णां सुरां पिबेत् । तया सकाये निर्दग्धे मुच्यते किल्बिषात्ततः ॥ ६१ ॥ गोमूत्रमग्निवर्णां वा पिबेदुदकमेव वा । पयो घृतं वाऽऽमरणाद्गोशकृद्रसमेव वा ॥ ६२ ॥ कणान् वा भक्षयेदब्दं पिण्याकं वा सकृन्निशि । सुरापानापनुत्त्यर्थं बालवासा जटी ध्वजी ॥ ६३ ॥ सुरा वै मलमन्नानां पाप्मा च मलमश्नुते । तस्माद्ब्राह्मणराजन्यौ वैश्यश्च न सुरां पिबेत् ॥ ६४ ॥ गौडी पैष्टी च माध्वी च विज्ञेया त्रिविधा सुरा । यथैवैका तथा सर्वा न पातव्या द्विजात्तमैः ॥ ६५ ॥ यक्षरक्षःपिशाचान्नं मद्यं मांसं सुरासवम् । तद्ब्राह्मणेन नात्तव्यं देवानामश्नता हविः ॥ ६६ ॥ मद्यपान-प्रायश्चित्त। द्विज अज्ञान से मद्य पीकर, आग के मुवाफ़िक़ तपाकर मद्य पीवे, उससे शरीर जलजाने पर पाप से छूटता है अथवा गोमूत्र, जल, गौ का दूध, घी, गोबर का रस इनमें किसी पदार्थ को आग के मुवाफ़िक़ लाल करके मरणान्त पिया करे । या अन्नकण या तिलं की खली एक साल तक रात में एक बार खाय । कम्बल ओढ़कर, बाल रखकर और मद्यपात्र का चिह्न धारण करे । सुरा अन्न का मल है और मल को पाप कहते हैं। इस कारण ब्राह्मण-क्षत्रिय-