मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ
पृष्ठ 607, कुल 649 में से
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( ३ )
स्तम्भ १
| श्लोकः | पृष्ठम् |
|---|---|
| अनभ्यासेन वेदानाम् | ... १६० |
| अनर्चितं वृथामांसम् | ... १५१ |
| अनातुराः खानितानि | ... १३१ |
| अनादेयं नाददीत | ... २७५ |
| अनादेशस्य चादानात् | ... २७५ |
| अनाम्नातेषु धर्मेषु | ... ४६० |
| अनारोग्यमनायुष्यम् | ... ३३ |
| अनार्यता निष्ठुरता | ... ३८५ |
| अनार्यमार्यकर्माणं | ... ३८७ |
| अनार्यायां समुत्पन्नः | ... ३८६ |
| अनाहिताग्निता स्तेयम् | ... ४०८ |
| अनित्यो विजयो यस्मात् | ... २४१ |
| अनिन्दितैः संविवाहैः | ... ७२ |
| अनिपुणस्त्वनवेक्षेत | ... ३४२ |
| अनिर्दशाया गोःक्षीरम् | ... १६१ |
| अनिर्दशाहां गां सूताम् | ... २८७ |
| अनुक्ते निष्कृतीनां तु | ... ४३३ |
| अनुगच्छेच्चया प्रेतम् | ... १७७ |
| अनुपघ्नन्पितृद्रव्यम् | ... ३५३ |
| अनुबन्धं परिज्ञाय | ... २६७ |
| अनुभावी तु यः कश्चित् | ... २५७ |
| अनुमन्ता विशसिता | ... १६६ |
| अनुरागःशुचिर्दक्षः | ... २१७ |
| अनुष्णाभिरफेनाभिः | ... ३३ |
| अनृतं च समुत्कर्षे | ... ४०७ |
| अनृतं तु वदन्दण्ड्यः | ... २५१ |
| अनृतावृतुकाले च | ... १८६ |
| अनेकानि सहस्राणि | ... १८७ |
| अनेन क्रमयोगेन | ... ५१ |
| अनेन क्रमयोगेन | ... २०४ |
| अनेन तु विधानेन् | ... ३४० |
स्तम्भ २
| श्लोकः | पृष्ठम् |
|---|---|
| अनेन नारीवृत्तेन | ... १८८ |
| अनेन विधिना नित्यम् | ... १८६ |
| अनेन विधिना यस्तु | ... ४१७ |
| अनेन विधिना राजा | ... २७६ |
| अनेन विधिना राजा | ... ३०४ |
| अनेन विधिना श्राद्धम् | ... ११२ |
| अनेन विधिना सर्वान् | ... २०३ |
| अनेन विप्रो वृत्तेन | ... १५६ |
| अन्तर्गतशवे ग्रामे | ... १३२ |
| अन्तर्दशाहे स्यातां चेत् | ... १७३ |
| अन्धो जडः पीठसर्पी | ... ३११ |
| अन्धो मत्स्यानिवाश्नाति | ... २६२ |
| अन्नमेषां पराधीनम् | ... ३८४ |
| अन्नहर्तामयावित्वम् | ... ४०६ |
| अन्नादे भ्रूणहा मार्ष्टि | ... ३०० |
| अन्नाद्यजोनां सत्त्वानाम् | ... ४२१ |
| अन्यदुक्तं जातमम्यत् | ... ३२४ |
| अन्यां चेद्दर्शयित्वान्या | ... २८१ |
| अन्यानपि प्रकुर्वीत | ... २१६ |
| अन्ये कृतयुगे धर्माः | ... १६ |
| अन्येषां चैवमादीनाम् | ... ३०२ |
| अन्येष्वपि तु कालेषु | ... २३८ |
| अन्योन्यस्याव्यभिचारः | ... ३३५ |
| अन्वाधेयं च यद्दत्तम् | ... ३५१ |
| अपः शस्तं विषं मांसम् | ... ३६० |
| अपःसुराभाजनस्थाः | ... ४२२ |
| अपत्यं धर्मकार्याणि | ... ३२२ |
| अपत्यलोभाद्या तु स्त्री | ... १८७ |
| अपदिश्यापदेश्यं च | ... २५५ |
| अपराजितां वास्थाय | ... १५४ |
| अपराह्ने तथा दर्भाः | ... १०८ |