भारतकोश
मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

महर्षि मनु द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished649 पृष्ठ

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श्लोकः | पृष्ठम् | श्लोकः | पृष्ठम् अत ऊर्ध्वं तु छन्दांसि | १३० | अधर्मदण्डनं लोके | २६८ अत ऊर्ध्वं त्रयोऽप्येते | ३० | अधर्मप्रभवं चैव | २०० अतः स्वल्पीयसि द्रव्ये | ३६६ | अधर्मेण च यः प्राह | ४२ अतपास्त्वनधीयानः | १४६ | अधर्मेणैधते तावत् | १४४ अतस्तु विपरीतस्य | २१२ | अधस्ताल्लोपद्व्याञ्च | १२३ अतिक्रान्ते दशाहे तु | १७३ | अधार्मिकं त्रिभिर्न्यायैः | २६८ अतिक्रामेत्प्रमत्तं या | ३३१ | अधार्मिको नरो यो हि | १४३ अतिथिं चाननुज्ञाप्य | १३५ | अधितिष्ठेच्च केशांस्तु | १३७ अतिवादांस्तितिक्षेत | १६७ | अधियज्ञं ब्रह्म जपेत् | २०४ अतैजसानि पात्राणि | १६८ | अधिविन्ना तु या नारी | ३३२ अतोऽन्यतममाश्रित्य | ४१२ | अधीत्य विधिवद्वेदान् | १६५ अतोऽन्यतमयावृत्त्या | ११६ | अधीयीरंस्त्रयो वर्णाः | ३७५ अत्युष्णं सर्वमन्नं स्यात् | १०४ | अधोदृष्टिर्नैकृतिकः | १४८ अथ गाथा वायुगीताः | ३२४ | अध्यक्षान्विविधान्कुर्यात् | २२० अथ मूलमनाहार्यम् | २८० | अध्यग्न्यध्यावाहनिकम् | ३५१ अदण्ड्यान्दण्डयन् राजा | ३६८ | अध्यात्मरतिरासीनः | १८८ अदत्तानामुपादानम् | ४४३ | अध्यापनं ब्रह्मयज्ञः | ७७ अदत्त्वा तु य एतेभ्यः | ८४ | अध्यापनमध्ययनम् | १७ अदर्शयित्वा तत्तैव | २७२ | अध्यापनमध्ययनम् | ३८८ अदातरि पुनर्दाता | २७३ | अध्यापयामास पितॄन् | ४६ अदीयमाना भर्तारम् | ३३३ | अध्येष्यमाणस्त्वाचान्तः | ३५ अदूषितानां द्रव्याणाम् | ३६६ | अध्येष्यमाणं तु गुरुः | ३६ अदेश्यं यश्च दिशति | २५५ | अनंशौ क्लीवपतितौ | ३५२ अद्भिरेव द्विजाग्र्याणाम् | ७१ | अनग्निरनिकेतः स्यात् | १६६ अद्भिर्गात्राणि शुध्यन्ति | १७६ | अनधीत्य द्विजो वेदान् | १६५ आद्भिस्तु प्रोक्षणं शौचम् | १८० | अनन्तरः सपिण्डाद्यः | ३४६ अद्वयोगिनर्नहतः क्षत्रम् | ३७१ | अन्तरगतशवेग्रामे | १३२ अद्यात्काकः पुरोडाशम् | २१० | अनन्तरमरिं विद्यात् | २३३ अद्रोहेणैव भूतानाम् | ११४ | अनन्तरासु जातानाम् | ३७६ अद्रोहेण च नार्तीयात् | १२६ | अनपत्यस्य पुत्रस्य | ३५४ अधर्मार्थैर्यैसिद्ध्यर्थे | २५४ | अनपेक्षितमर्यादम् | २६८