मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें६६ मनुस्मृति । वागप के कर्ता ) चौथा नर-नारायण ( धर्मपत्नी से उत्पन्न होकर दुश्चर तप करनेवाले ) पांचवां कपिल ( कालवशसुप्त- सांख्य को आसुरिनाम ब्राह्मण को बतलानेवाले ) छठां दत्तात्रेय ( अत्रि से अनसूया में जन्म लेकर प्रह्लाद आदि को अध्यात्म-विद्या पढ़ानेवाले ) सातवां यज्ञ ( रुचि से आकूति में पैदा होकर अपने यामादिक पुत्रों के साथ स्वायंभुव मन्वन्तर के पालक ) आठवां ऋषभ ( नाभि से मेरुदेवी में उत्पन्न- अत्याश्रमी ) नवां पृथु ( पृथ्वी को दुहनेवाले ) दशवां मत्स्य ( मनु के रक्षक ) ग्यारहवां कूर्म ( समुद्र-मथन के समय मन्दराद्रि को अपने पीठ पर धारण करनेवाले ) बारहवां धन्वन्तरि ( आयुर्वेदके प्रकाशक ) तेरहवां मोहिनी ( स्त्रीरूप से असुरों को मोहित करके सुरों को अमृत पिलानेवाले ) चौदहवां नृसिंह ( हिरण्यकशिपु के नाशकर्ता ) पन्द्रहवां वामन ( बलिको बांध- नेवाले ) सोलहवां परशुराम ( इक्कीस बार क्षत्रियों का संहार करनेवाले ) सत्रहवां व्यास ( पराशर से सत्यवती में जन्म लेकर वेदों के विभाग करनेवाले ) अठारहवां राम ( दशरथ के पुत्र बन कर रावण के विध्वंसक ) उन्नीसवां राम-कृष्ण ( यदुकुल में प्रकट होकर भूभार के हर्ता ) बीसवां बुद्ध ( अजन के पुत्र देवद्वेषियों के मोहक ) इक्कीसवां कल्कि का अवतार ( विष्णुयशा के पुत्र चौरप्राय राजाओं के विनाशक ) । १-३ कहीं राम, तथा कृष्ण की अलग २ अवतार संख्या दी है; नर और नारायण की एकही संख्या दी है; बुद्ध के पितृनाम में 'जिन' यह पाठान्तर श्रीधरी टीका से प्राप्त होता है । ४ ' अवतारा ह्यसंख्येया हरेः सत्त्वनिधेर्द्विजाः ' इससे अवतारों की असंख्ये- यता, तथा ' एतद्रूपं भगवतो ह्यरूपस्य चिदात्मनः । मायागुणैर्विरचितं महदादिभि- रात्मनि ॥ ' इससे रूपाभ्यास, तथा ' यथा नभसि मेघौघो रेणुर्वा पार्थिवोऽनिले । एवं द्रष्टरि दृश्यत्वमारोपितमबुद्धिभिः ॥ ' यह दृष्टान्त दिया है । देखो श्रीधरी ।