भारतकोश
संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण

संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण

Markandeya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished296 पृष्ठ

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  • संक्षिप्त मार्कण्डेयपुराण *
पद्ममें नियुक्त किया। तीसरी संतान तपती नामकी कन्या थी। उसने राजा संवरणको अपना स्वामी बनाया और उनसे कुरु नामक पुत्रको जन्म दिया। ये कुरु एक प्रसिद्ध राजा हुए। <br> वैवस्वत मन्वन्तरमें आठ देवगण माने गये हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं—आदित्य, वसु, रुद्र, साध्य, विश्वेदेव, मरुत्, भृगु तथा अङ्गिरा। इनमें आदित्यगण, मरुद्गण तथा रुद्रगण कश्यपजीके पुत्र हैं। साध्यगण, वसुगण और विश्वेदेवगण—ये धर्मके पुत्र हैं। भृगुगण भृगुके और आङ्गिरसगण महर्षि अङ्गिराके पुत्र हैं। ब्रह्मन्! यह सब नारीच सर्ग है। मरीचिनन्दन कश्यपकी संतान होनेके कारण इन्हें मारीच कहते हैं। इस मन्वन्तरमें जो इन्द्र हैं, उनका नाम ऊर्जस्वी है। वे महात्मा यज्ञभागके भोक्ता हैं। भूत, भविष्य और वर्तमानमें जो इन्द्र होते हैं, उन सबका लक्षण एक सा ही समझना चाहिये। <br> अब वर्तमान त्रिलोकीका वर्णन सुनो। भूर्लोक तो यह पृथ्वी है। अन्तरिक्षको द्युलोक या भुवर्लोक माना गया है और दिव्यलोकको स्वर्लोक कहते हैं। अत्रि, वसिष्ठ, कश्यप, गौतम, भरद्वाज, विश्वामित्र तथा जमदग्नि—ये ही इस मन्वन्तरके सप्तर्षि हैं। इक्ष्वाकु, नृग, धृष्ट, शर्याति, नरिष्यन्त, नाभाग, अरिष्ट, करूष और पृषध्र—ये नौ वैवस्वत मनुके पुत्र कहे गये हैं। इस प्रकार मैंने तुमसे यह वैवस्वत मन्वन्तरका वर्णन किया है। इसका श्रवण और पाठ करनेसे मनुष्य सब पापोंसे छूट जाता और महान् पुण्यका भागी होता है। <br> क्रौष्टुकि बोले— महामुने! आपने स्वायम्भुव आदि सात मनुओंका वर्णन किया तथा उनकेमन्वन्तरोंमें जो देवता, राजा और मुनि हुए थे, उनको भी बतलाया। इस कल्पमें जो दूसरे सात मनु होंगे, उनका परिचय दीजिये तथा उनके मन्वन्तरोंमें जो देवता आदि होनेवाले हैं, उनका भी वर्णन कीजिये। <br> मार्कण्डेयजीने कहा— ब्रह्मन्! छायासंज्ञाके पुत्र सवर्णिका नाम मैं तुम्हें बतला चुका हूँ। वे सब बातोंमें अपने बड़े भाई वैवस्वत मनुके ही समान हैं। ये ही आठवें मनु होंगे। परशुराम, व्यास, गालव, दीप्तिमान्, कृप, ऋष्यशृङ्ग तथा अश्वत्थामा—ये सात सावर्णि मन्वन्तरमें सप्तर्षि होंगे। सुतपा, अमिताभ और मुख्य—ये तीन देवगण होंगे। इनमेंसे प्रत्येक गण पृथक्-पृथक् बीस-बीस देवताओंका समुदाय होगा। तपस्तप, शक्र, द्युति, ज्योति, प्रभाकर, प्रभास, दयित, धर्म, तेज, रश्मि तथा वक्रतु आदि देवता सुतपागणके बीस देवताओंके अन्तर्गत हैं। प्रभु, विभु और विभास आदि देवता अमिताभ नामक द्वितीय गणके बीस देवताओंके अन्तर्गत हैं। तीसरे गणके जो बीस देवता हैं, उनमें दम, दान्त, रित, सोम और विन्त आदि प्रधान हैं। वे मुख्यगणके देवता कहे गये हैं। ये सभी मन्वन्तरके स्वामी होंगे। ये मरीचिनन्दन प्रजापति कश्यपके ही पुत्र हैं। विरोचनके पुत्र बलि इनके इन्द्र होंगे। वे बलि आज भी अपनी प्रतिज्ञाके बन्धनसे बँधकर पाताललोकमें विराजमान हैं। विरजा, अर्ववीर, निर्मोह, सत्यवाक्, कृति तथा विष्णु आदि सावर्णि मनुके पुत्र होंगे।