भारतकोश
संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण

संक्षिप्त मार्कण्डेय पुराण

Markandeya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished296 पृष्ठ

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पृष्ठ 275

• ध्रुप, विविंश, खनीनेत्र, करन्धम, अवेक्षित तथा मरुत्तके चरित्र • २७९


तेजमें सूर्य, धैर्यमें समुद्र और क्षमामें पृथ्वीके समान थे। वीरतामें तो उनकी समानता करनेवाला कोई था ही नहीं। एक समयकी बात है, वे वैदिशके राजा विशालकी कन्या वैशालिनीको प्राप्त करनेके लिये उसके स्वयंवरमें गये। वह सुन्दर दाँतोंवाली सुन्दरी समस्त राजाओंकी उपेक्षा करके चली जा रही थी, इतनेमें ही अवेक्षितने उसे बलपूर्वक पकड़ लिया। उन्हें अपने बलका बहुत अभिमान था। उनके इस कार्यसे अन्य समस्त राजाओंका, जो बहुत बड़ी संख्यामें एकत्रित थे, अपमान हुआ; अतः वे खिन्न होकर एक-दूसरेसे कहने लगे—'अनेक बलशाली राजाओंके होते हुए किसी एकके द्वारा नारीका अपहरण हो और आपलोग उसे क्षमा कर दें, तो यह धिक्कार देनेयोग्य बात है। क्षत्रिय वह है, जो दुष्ट पुरुषोंसे सताये जानेवालेकी रक्षा करे, उसकी क्षति न होने दे। जो ऐसा नहीं करते, वे लोग इस नामको व्यर्थ ही धारण करते हैं। संसारमें कौन मनुष्य मृत्युसे नहीं डरता, किन्तु युद्ध न करके भी कौन अमर रह गया है। यह विचारकर शस्त्रधारी क्षत्रियोंको पुरुषार्थका त्याग नहीं करना चाहिये।'

यह सुनकर सब राजा अमर्षमें भर गये और परस्पर सलाह करके सभी हथियार ले उठ खड़े हुए। कुछ रथोंपर जा बैठे। कुछ हाथियों और घोड़ोंपर सवार हुए तथा दूसरे कितने ही राजा कुपित हो पैदल ही अवेक्षितसे लोहा लेनेको जा पहुँचे। अवेक्षित अकेले थे। उनके विरोधमें बहुत-से राजा और राजकुमार थे। उनमें बड़ा भयङ्कर संग्राम हुआ। तलवार, शक्ति, गदा और धनुष-बाण लिये हुए समस्त राजा अवेक्षितपर प्रहार करने लगे तथा राजकुमार अवेक्षित भी अकेले ही उन सारे राजाओंसे भिड़ गये और सैकड़ों बाणोंसे मारकर उन्हें घायल करने लगे। अवेक्षितने किसीकी बाँह काट डाली, किसीकी गर्दन उड़ा दी, किसीकी छाती छेद डाली और किसीके वक्षमें प्रहार किया। शत्रुओंके आते हुए बाणोंको वे बाण मारकर दो टुकड़े कर देते थे। किसीकी तलवार काट देते और किसीका धनुष खण्डित कर देते थे। कोई राजकुमार अपना कवच कट जानेके कारण पलायन कर गया। दूसरा अवेक्षितके बाणोंसे घायल होकर पैदल ही रणभूमिसे भाग गया। इस प्रकार जब राजाओंकी सारी मण्डली व्याकुल हो गयी, तब सात सौ वीर मरनेका निश्चय करके युद्धके लिये डट गये। उन सबको अपने उत्तम कुल, युवावस्था तथा शौर्यकी लाज रखनी थी। जब सारी सेना परास्त होकर भागने लगी तब ये ही सात सौ राजा एक साथ मिलकर अवेक्षितसे युद्ध करने लगे। अवेक्षित अत्यन्त क्रोधमें भरकर धर्मयुद्धके नियमसे लड़ने लगे। उन्होंने उन सबके हथियारों और कवचोंको काट गिराया। तब उन राजाओंने धर्मसे विमुख हो चारों ओरसे अवेक्षितको घेर लिया और सब ओरसे उन्हें हजारों बाणोंसे बाँधने लगे। बहुतोंके प्रहारसे पीड़ित हो वे अत्यन्त व्याकुल हो उठे और अत्यन्त विह्वल होकर पृथ्वीपर गिर पड़े। इस अवस्थामें उन सबने मिलकर धर्मपूर्वक उन्हें बाँध लिया और राजा विशालके साथ वैदिश नगरमें प्रवेश किया।

तदनन्तर राजा करन्धम, उनकी पत्नी वीरा तथा अन्य राजाओंने अवेक्षितके बाँधे जानेका समाचार सुना। कुछ लोगोंने करन्धमसे कहा—'महाराज! ये सभी राजा वध करनेके योग्य हैं, जिन्होंने अधिक संख्यामें सम्मिलित होकर अकेले राजकुमारको अधर्मपूर्वक बाँधा है।' दूसरे बोले—'आप चुपचाप बैठे क्यों हैं, शीघ्र ही सेना तैयार कीजिये। दुष्ट विशालको तथा वहाँ आये हुए