भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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विकासवाद १३३

डार्विनके मतानुसार—‘मनुष्यकी बुद्धि एव शरीरकी पशुओकी बुद्धि एव शरीरमे समानता मिलती है, अतः जैसे मछलियोंमे कछुआ, पक्षी आदि क्रमसे बदरोंका आविर्भाव हुआ, वैसे ही बदरोंसे मनुष्योंका आविर्भाव हुआ ।' डार्विनके मतानुसार 'बदर यदि मनुष्यके पूर्वज नहीं तो उनके चचेरे भाई अवश्य हैं । अर्थात् दोनोंके पूर्वज अवश्य एक हैं। पशुओंमें स्मृति, सौन्दर्य, ज्ञान, सहानुभूति आदि गुण मनुष्यके समान ही होते हैं। घोडों, कुत्तों आदिको शिक्षित किया जाता है। अतः उनमें विवेक भी रहता है। सामान्य कीटोंसे लेकर मनुष्यतक क्रमेण विकास मानना ही उचित है। बीचकी श्रेणियोंको छोडकर कीडो एवं मनुष्योंका भेद बहुत भारी मालूम पडता है, किंतु क्रमानुगत रूपसे देखें तो कोई आश्चर्यकी बात नहीं लगती। इसी तरह मनुष्यकृत यन्त्रों एव गृह आदि अन्य पदार्थोंका इतिहास देखें तो अन्तिम और आदिम अवस्थामें आकाश-पातालका अन्तर प्रतीत होता है, परन्तु क्रमोन्नति देखनेपर कोई आश्चर्य प्रतीत नहीं होता ।' अध्यात्मवादियोंके मता

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