भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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१६४ मार्क्सवाद और रामराज्य परिस्थितिवश साँप ऊँट नहीं हो जाता । यदि एक ही प्राणीका यन्त्रोकी तरह अनेक योनियोंमें विभाग माना जाय तो अनेक आपत्तियाँ होगी । १-एक कोष्ठके अमीवामें स्त्री और पुरुष यह भेद कैसे हुआ ? २-यदि अमीवाके बाद दो कोष्ठका हाइड्रा हुआ, तो क्रमसे उत्तरोत्तर सभी योनियों दुगुने परिमाणसे बढ़नी चाहिये अर्थात् वजन और आकार आदि उत्तरोत्तर दुगुने होने चाहिये । फिर तो मनुष्यको हाथी, ऊँट आदिसे कई गुना बड़ा होना चाहिये । पखधारी प्राणी सर्पणशील प्राणियोंके बाद होता है, फिर तितली आदि क्रिमि पखधारी कैसे हो गये ? अस्थियोकी उत्पत्ति कैसे हुई ? अस्थिहीनोंसे अस्थिवालोंकी उत्पत्ति कैसे हुई ? जब पक्षी, जल-जन्तु एव कीड़ेतक मांसाहारी होते हैं, तब मांसाहारियोका समावेश स्तनधारियोंमें ही क्यो किया गया ? एक ही परिस्थितिमें उत्पन्न होनेपर भी स्त्रियोंको दाढ़ी-मूँछ क्यो नहीं ? मयूरीको लंबी पूँछ क्यो नही ? मुर्गीके सिरपर कलँगी क्यो नही और हथिनीको बड़े दाँत क्यो नहीं ? प्राणियोके दाँतोकी संख्यामें न्यूनाधिकता क्यो ? घास खानेवाले स्तनधारियोंमें गाय, भैसके ऊपरी दाँत क्यो नहीं ? घोड़ेके ऊपरी दाँत भी क्यो होते हैं ? कुत्तोके दूधके दाँत क्यो नही गिरते ? घोड़ेके स्तन क्यो नहीं होते ? बैलके स्तन अंडकोषोके पास क्यो होते हैं ? पुरुषोमे स्तनोंका क्या प्रयोजन है ? घोड़ेके पैरमें परोके चिह्न क्यो हैं ? बच्चा पैदा होते समय घोड़ीकी जीभ क्यो गिर जाती है और दूसरे जानवरोकी जीभ क्यो नहीं गिरती ? स्त्री जाति अस्थियाँ क्यो नही उत्पन्न कर सकती ? यदि यन्त्रके सिद्धान्तपर प्राणियोका विकास हुआ है तो कछुए और साँपकी अपेक्षा पक्षी और स्तनधारी क्यो कम जीते हैं ? अधिक जीनेवालोका कम जीनेवालोसे गर्भवास कम क्यो है ? अतः परिस्थितिसे ही प्राणी एक जातिसे अन्य जातिका नहीं हो जाता । कोई प्राणी अपनी मूलजातिसे इतनी दूर नही हो सकता जहाँ समान-प्रसव, समान-भोग, समान आयुका सिलसिला भी बंद हो जाय । स्त्री पुरुषकी बनावट भी परिस्थितिके सिद्धान्तका खण्डन करती है । आयुके सिद्धान्तसे ही यान्त्रिक सिद्धान्त खण्डित होता है । लुप्त-जन्तु यह भी कहा जाता है कि 'पृथ्वीकी तहोमे लुप्त हुए पाषाणमय प्राणियो- की खोजसे भी विकास सिद्ध होता है । प्राणियोकी शृङ्खलाकी कुछ कड़ियाँ नहीं मिलती क्योकि वे आज लुप्त हो चुकी हैं। 'लुप्त-जन्तु-शास्त्र' से वर्तमान- कालमें अविद्यमान लुप्त जन्तुओंका पता लगाया जाता है । एल० म्यूजियममे घोड़ेकी, साउथ कैन्सिगटनमें हाथी-दाँतोकी, ब्रूसेल्समें इग्वेनोडसकी और क्रिस्टल् पैलेस, न्यूयार्क, लन्डन, जेयनामें अन्य प्राणियोकी पाषाणीभूत