मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)
Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
पृष्ठ 200, कुल 866 में से
संदर्भ में पढ़ेंकई जातियाँ बन जाती हैं । अन्तमें सर्वश्रेष्ठ रचना स्थिर रहती है । यही प्राणियों- के विकासका दृष्टान्त है । विकासकी विधिमें सबसे प्रथम बात अनुकूलन ( एडाप्टेशन् ) की है अर्थात् परिस्थितिके अनुसार प्राणी बनता है । परिस्थितियोके अनुसार प्राणियोंमें परिवर्तन होते हैं और सततिमें वे परिवर्तन सक्रान्त होते हैं । परिवर्तन ( वेरियेशन ) में भी परिस्थिति, कार्य और पैतृक सस्कार हेतु होते हैं । सर्दी-गर्मी, नदी-नाले, वन-पहाड़में बसनेवालोंमें प्रेम, भय, भूख, प्यास और बीमारी आदि परिस्थितियाँ होती हैं । प्राणी जब ठण्डे देशसे गरम देशमें आता है, तब उसे क्षयकी बीमारी होती है । गरम देशसे ठण्डे देशमे और ठण्डे देशसे गर्म देशमें आनेपर फेफडेकी बीमारी होती है । अंधेरेमें वृक्षोंके पत्ते पीले पड जाते हैं । ठण्डे देशके कुत्ते गरम देशमें जानेपर मर जाते हैं । अवर्षणके साथ वृक्ष सूख जाते हैं और उनमें नाना प्रकारके अवयव फूट पड़ते हैं । कार्य ( फक्शन ) से भी परिवर्तन होते हैं । उदाहरणार्थ लोहारका हाथ कठोर हो जाता है । हाथ ऊँचा रखनेवाले साधुओका हाथ पतला हो जाता है । इसी तरह पैतृक सस्कारोसे भी परिवर्तन होता है । जैसे कुष्ठ आदि बीमारियाँ सतानोमें होती हैं । विलायतमें प्रायः भूरे बाल और काली आँखवाले स्त्री-पुरुषोंसे श्वेत केश और भूरी आँखवाली सतान होती है ।'
प्राकृतिक चुनाव
विकासकी दूसरी विधि डार्विनके प्राकृतिक चुनावकी है, जिसके पाँच तत्त्व हैं—' ( १ ) सर्वत्र विद्यमान परिवर्तन है, ( २ ) अत्युत्पादन, ( ३ ) जीवन सग्राम, ( ४ ) अयोग्योका नाश और योग्योकी रक्षा तथा ( ५ ) योग्यताओका सततिमे संक्रमण । परिवर्तनका अभिप्राय यह है कि प्रत्येक प्राणी- की सततिमें भी भेद होता है । इस भेदका भी नियम है । इग्लैंडमें सबसे अधिक संख्या उन लोगोंकी है, जो ५ फुट ८ इन्चसे ९ इन्चतक लंबे होते हैं। इनसे कम वे हैं, जिनकी लंबाई ५ फुट ७ इन्चसे ८ इन्चतक और ५फुट ९ इन्चसे १० इन्चतक है । इनसे भी कम वे हैं, जिनकी लंबाई ५ फुट ५ इन्चसे ६ इन्चतक और ५ फुट १० इन्चसे ११ इन्चतक है । इन सबसे कम वे हैं, जिनकी लंबाई इनसे भी कम या ज्यादा होती है । इससे यह नियम बनता है कि यदि पर्याप्त संख्यामें औसत लंबाई ५ फुट ८ इन्च ज्ञात है और उससे अमुक न्यून लंबाईवालोंकी संख्या भी ज्ञात है, तो अधिक लंबाईवालोकी संख्या बतलायी जा सकती है । यह परिवर्तनके निश्चित नियमका उदाहरण है । 'अत्युत्पादन' का अभिप्राय यह है कि १५ वर्षमें चिडीके जोडेसे २ अरबसे कुछ अधिक सतति उत्पन्न होती है । पेटका एक कीडा ३० करोड़ अडे देता है । इनमेंसे कई कीड़े ऐसे हे, जो २४ घंटेमें १ करोड ७० लाख कीड़े उत्पन्न करते