भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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रहनेपर अभावका व्यवहार होता है । कपालादिसे तिरोभूत होनेपर घटादिके नष्ट होनेका व्यवहार हुआ करता है। कहा जा सकता है कि पिण्ड-कपालादि घटादिके समान देशवाले होनेके कारण आवरण नहीं हो सकते, क्योंकि तम और कुड्यादि (दीवार) आवरण घटादिसे भिन्न देशवाले होते हैं अर्थात् आवृतके देशसे भिन्न देशवाला ही आवरण होता है, परंतु पिण्ड-कपाल आदि तो सर्वथा आवृतके ही देशवाले होते हैं। यह कहना भी ठीक नहीं, क्योंकि क्षीर जलके समान देशमें रहकर भी जलका आवरक रहता है । समानदेशत्व आवरणका बाधक है—इसका क्या अभिप्राय है ? एकाश्रयाश्रितत्व या एककारणत्व ? अर्थात् जो दो वस्तु एक आश्रयमें आश्रित होते हैं उनमें एक दूसरेका आवरक नहीं होता । अथवा जिन दो वस्तुओंका एक ही कारण होता है उनमें एक दूसरा आवरक नहीं होता। इनमें पहला पक्ष ठीक नहीं, क्योंकि एकाश्रयाश्रित होनेपर भी क्षीरके द्वारा क्षीरमिश्रित जलका आवरण होता ही है, तथा दूसरा पक्ष भी ठीक नहीं, क्योंकि कार्यभेदसे कारणका भेद होता है । अतः घटादिके