भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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४९० मार्क्सवाद और रामराज्य वह अभाव क्या है ? घटका स्वरूप ही है या अर्थान्तर ? यदि प्रथम पक्ष कहे तो ठीक नहीं; क्योकि यदि घटस्वरूप ही हो तो घटके द्वारा उसका व्यपदेश कैसे हो ? अर्थात् अभेदमे घटका प्रागभाव इस रूपसे भेदमूलक सम्बन्ध व्यवहार कैसे होगा ? यदि कहा जाय कि कल्पित सम्बन्धको ही लेकर व्यवहार बनता है तो भी यही कहना पडेगा कि कल्पित अभावका ही 'घटस्य प्रागभावः' इस रूपसे व्यवहार होता है। घटस्वरूपका घटसे व्यपदेश नहीं बन सकता । यदि कहा जाय कि घटाभाव घटसे अर्थान्तर है तो वह घटसे अर्थान्तर कारणरूप ही हुआ तथा च घटप्रागभाव घटकारणरूप ही ठहरा । अभिव्यञ्जकके व्यापार होनेसे नियमेन घटकी अभिव्यक्ति होती है, अभिव्यञ्जक व्यापार न होनेसे नहीं । इस तरह अन्वयव्यतिरेकसे घटादि कार्योंके लिये कुलालादि-व्यापार सार्थक होते हैं । उस व्यापारसे आवरण-भङ्ग आर्थिक रूपसे हो जाता है । कारणमे वर्तमान एक कार्य इतर कार्योंका आवरक होता है । यदि घटादिके पूर्वाभिव्यक्त पिण्डादि