भारतकोश
मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

मार्क्सवाद और रामराज्य (स्वामी करपात्री जी महाराज - साम्यवाद समीक्षा एवं वैदिक समाज-दर्शन)

Marxvad aur Ramrajya of Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished866 पृष्ठ

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( ८ ) केवल बाहरी आक्षेप थे। पुस्तकके किसी अंशपर कुछ न लिखकर स्वामीजीके लेखन आदिपर ही संदेह किया गया था। अतः उसका उत्तर इसमें न देकर महाराजजीने उसे अलगसे ही प्रकाशित करना उचित समझा। वह धर्मसंघ, दुर्गाकुण्ड, काशीके पतेपर मिल सकती है। 'कल्याण' सम्पादन-विभाग } गीता-वाटिका, गोरखपुर } जानकीनाथ शर्मा कुछ समाचार-पत्रोंकी सम्मतियाँ 'नवभारत टाइम्स' दिल्ली, बंबई [ १४ दिसम्बर १९५८ ]— भौतिकवादकी प्रचण्ड आँधीने समस्त संसारकी चिन्तनधाराको झकझोर दिया है। आज संसारकी लगभग आधी आबादी मार्क्सवादसे प्रेरणा लेकर अपने-अपने ढंगपर आर्थिक उन्नयनके लिये प्रयत्नशील है। भारत भी इस हवासे अछूता नहीं है। पर यहाँकी दार्शनिक एव सांस्कृतिक परंपराओंको लाँघकर कोई भी वाद इस देशमें पनप नहीं सकता। ऐसा क्यो नहीं होगा और क्यों नही होना चाहिये, इसी वस्तुको स्पष्ट करनेके लिये स्वामी श्रीकरपात्रीजीकी यह रचना है। प्रस्तुत ग्रन्थमे न केवल मार्क्स, बल्कि तमाम पश्चिमी राजनीति-शास्त्रों- का गम्भीर विश्लेषणद्वारा खण्डन किया गया है। वस्तुतः यह एक अनुपम ग्रन्थ है। युगधर्म—( नागपुर, जबलपुर ) हर व्यक्तिके लिये पुस्तक संग्रहणीय है। हिंदी इस रचनाके लिये चिर ऋणी रहेगी। भारतीय कम्युनिस्ट ही नहीं, सभी प्रगतिशील इस पुस्तकसे वह भाषा और विचार सीख सकते हैं जो आज भारतकी 'प्रगति'के नामवाली वास्तविक 'दुर्गति' के पाशसे मुक्त करनेके लिये परमावश्यक है। 'वेंकटेश्वर समाचार,' बबई—विद्वान् लेखकका यह महान् प्रयास अभिनन्दनीय एवं प्रशंसनीय है। भारतके वर्त्तमान सभी राजनीतिक दलोंके कार्यकर्त्ताओं तथा पाश्चात्त्य दर्शनोंके प्रशंसकोंको यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिये। पूज्य स्वामीजी महाराजका यह महान् प्रयास समाज और राष्ट्रके लिये परम कल्याणकारक है। इसी प्रकार 'भारत, आर्यावर्त्त,' कान्ति (रामपुर मई १९५९) आदिने प्रशंसा की है।