मत्स्य महापुराण

मत्स्य महापुराण
Matsya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished1,098 पृष्ठ
पृष्ठ 9, कुल 1098 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 9
[ ७ ]
| अध्याय विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| ८५- गुडपर्वतके दानकी विधि और उसका माहात्म्य | ३०५ | १०५- प्रयागमें मरनेवालोंकी गति और गो-दानका महत्त्व | ३५९ |
| ८६- सुवर्णाचलके दानकी विधि और उसका माहात्म्य | ३०६ | १०६- प्रयाग-माहात्म्य-वर्णन-प्रसङ्गमें वहाँके विविध तीर्थोंका वर्णन | ३६१ |
| ८७- तिलशैलके दानकी विधि और उसका माहात्म्य | ३०७ | १०७- प्रयाग-स्थित विविध तीर्थोंका वर्णन | ३६५ |
| ८८- कार्पासाचलके दानकी विधि और उसका माहात्म्य | ३०७ | १०८- प्रयागमें अनशन-व्रत तथा एक मासतकके निवास (कल्पवास)-का महत्त्व | ३६७ |
| ८९- घृताचलके दानकी विधि और उसका माहात्म्य | ३०८ | १०९- अन्य तीर्थोंकी अपेक्षा प्रयागकी महत्ताका वर्णन | ३७० |
| ९०- रत्नाचलके दानकी विधि और उसका माहात्म्य | ३०९ | ११०- जगत्के समस्त पवित्र तीर्थोंका प्रयागमें निवास | ३७२ |
| ९१- रजताचलिके दानकी विधि और उसका माहात्म्य | ३१० | १११- प्रयागमें ब्रह्मा, विष्णु और शिवके निवासका वर्णन | ३७४ |
| ९२- शर्कराशैलके दानकी विधि और उसका माहात्म्य तथा राजा धर्ममूर्तिके वृत्तान्त-प्रसङ्गमें लवणाचल-दानका महत्त्व | ३११ | ११२- भगवान् वासुदेवद्वारा प्रयागके माहात्म्यका वर्णन | ३७५ |
| ९३- शान्तिक एवं पौष्टिक कर्मों तथा नवग्रहशान्तिकी विधिका वर्णन | ३१५ | ११३- भूगोलका विस्तृत वर्णन | ३७७ |
| ९४- नवग्रहोंके स्वरूपका वर्णन | ३२८ | ११४- भारतवर्ष, किम्पुरुषवर्ष तथा हरिवर्षका वर्णन | ३८३ |
| ९५- माहेश्वर-व्रतकी विधि और उसका माहात्म्य | ३२९ | ११५- राजा पुरूरवाके पूर्वजन्मका वृत्तान्त | ३९० |
| ९६- सर्वफलत्याग-व्रतका विधान और उसका माहात्म्य | ३३२ | ११६- ऐरावती नदीका वर्णन | ३९१ |
| ९७- आदित्यवार-कल्पका विधान और माहात्म्य | ३३४ | ११७- हिमालयकी अद्भुत छटाका वर्णन | ३९४ |
| ९८- संक्रान्ति-व्रतके उद्यापनकी विधि | ३३७ | ११८- हिमालयकी अनोखी शोभा तथा अत्रि-आश्रमका वर्णन | ३९६ |
| ९९- विभूतिद्वादशी-व्रतकी विधि और उसका माहात्म्य | ३३८ | ११९- आश्रमस्थ विवरमें पुरूरवाका प्रवेश, आश्रमकी शोभाका वर्णन तथा पुरूरवाकी तपस्या | ४०१ |
| १००- विभूतिद्वादशीके प्रसङ्गमें राजा पुष्पवाहनका वृत्तान्त | ३४० | १२०- राजा पुरूरवाकी तपस्या, गन्धर्वों और अप्सराओंकी क्रीड़ा, महर्षि अत्रिका आगमन तथा राजाको वरप्राप्ति | ४०५ |
| १०१- साठ व्रतोंका विधान और माहात्म्य | ३४४ | १२१- कैलास पर्वतका वर्णन, गङ्गाकी सात धाराओंका वृत्तान्त तथा जम्बूद्वीपका विवरण | ४०९ |
| १०२- स्नान और तर्पणकी विधि | ३५१ | १२२- शाकद्वीप, कुशद्वीप, क्रौञ्चद्वीप और शाल्मलद्वीपका वर्णन | ४१५ |
| १०३- युधिष्ठिरकी चिन्ता, उनकी महर्षि मार्कण्डेयसे भेंट और महर्षिद्वारा प्रयाग-माहात्म्यका उपक्रम | ३५४ | १२३- गोमेदकद्वीप और पुष्करद्वीपका वर्णन <br> मत्स्यावतार-कथा-प्रसङ्ग | ४२३ <br> ४२८ |
| १०४- प्रयाग-माहात्म्य-प्रसङ्गमें प्रयाग-क्षेत्रके विविध तीर्थस्थानोंका वर्णन | ३५७ | १२४- सूर्य और चन्द्रमाकी गतिका वर्णन | ४२९ |