भारतकोश
मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

पृष्ठ 199, कुल 395 में से

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षोडशोऽध्यायः 卐 प्रस्तरकरणम् १७५ संज्ञक होता है। पाँच सूत्रों से प्रदक्षिणक्रम (बायें से दाहिने) से निर्मित छिद्रयुक्त जालक नन्द्यावर्त आकृति का होने के कारण नन्द्यावर्त संज्ञक होता है। तिरछे एवं सीधे स्तम्भों से निर्मित एवं कम्पयुक्त जालक की संज्ञा ऋजुक्रिय होती है।।५८-५९।। पुष्पखण्डं सकर्णं च नन्द्यावर्तं तथोच्यते। भित्तिमध्याद्वहिस्तस्य स्तम्भयोगं कवाटयुक् ॥६०॥ पुष्पखण्ड एवं सकर्ण जालक नन्द्यावर्त के समान होते हैं। भित्ति के मध्य से हट कर जालकों के स्तम्भों का योग होता है एवं जालक कवाट (पल्लों) से युक्त होते हैं।।६०।। कवाटयुगलं वैकं घाटनोद्घाटनक्षमम्। पादवर्गे भवेद् ग्रीवावर्गे वातायनस्थितिः ॥६१॥ ये कवाट एक अथवा दो होते हैं एवं खुलने तथा बन्द होने में समर्थ होते हैं। जालकों की स्थिति स्तम्भ के बराबर अथवा भवन की ग्रीवा के बराबर होती है।।६१।। गुलिकाजालकं धामविन्यासाकृतिरन्ध्रकम् । स्वस्तिकं वर्धमानं च सर्वतोभद्रसन्निभम् ॥६२॥ गोल आकृति वाले जालक सूर्य की आकृति वाले एवं छिद्रयुक्त होते हैं। ये स्वस्तिक, वर्धमान तथा सर्वतोभद्र प्रकार के होते हैं।।६२।। ✺ भित्तिः ✺ द्रुमोपलेष्टकाद्रव्यैर्युक्त्या युञ्जीत बुद्धिमान् । जालकं फालकं कुड्यमैष्टकञ्च त्रिधा मतम् ॥६३॥ दीवार—बुद्धिमान (स्थपति) को गृहस्वामी की इच्छानुसार अथवा आवश्यकता- नुसार) काष्ठ, प्रस्तर अथवा ईंटों से भित्ति-निर्माण करना चाहिये। इस प्रकार जालक (काष्ठ-निर्मित), फलक (प्रस्तरफलकों से निर्मित) तथा ऐष्टक (ईंटों से निर्मित) तीन प्रकार की भित्तियाँ होती हैं।।६३।। जालकं जालकैर्युक्तमिष्टकामयमैष्टकम्। फालकं फलकोपेतं भित्तिमध्येऽङ्घ्रिसंयुतम् ॥६४॥ जालक भित्ति जालकों (काष्ठनिर्मित) से युक्त, ऐष्टक भित्ति ईंटों से युक्त तथा फालक भित्ति फलकों (प्रस्तरखण्डों) से युक्त होती है। भित्ति के मध्य में पाद होते हैं।।६४।। भित्तिबन्धनमूर्ध्वाधःपद्मसङ्घट्टपट्टिकम् । पादपादषडष्टांशबहला फलका भवेत् ॥६५॥

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