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मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey

मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा

DevanagariHindipublished395 पृष्ठ

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२८२ मयमतम् करना चाहिये। इस प्रकार मन्दिरों का लक्षण संक्षेप में वर्णित किया गया। एक तल से लेकर बारह तल तक के भवन की ऊँचाई एवं चौड़ाई हस्त-मान से वर्णित की गई है। कूट एवं कोष्ठ आदि अङ्गों के भेदों का क्रमानुसार वर्णन किया गया। देवों के प्रिय एवं पवित्र विमानों एवं उनके विभिन्न भेदों का दोषहीन वर्णन जिस प्रकार प्राचीन ऋषियों ने किया, जिसका प्रथमतः ब्रह्मा ने उपदेश दिया, उसे संक्षिप्त करके मय ने यहाँ प्रस्तुत किया।।९३-९४।। व्याख्यात्मक टिप्पणी १. चार तल वाले भवन चार तल वाले भवनों का वर्णन मानसार ( अ. २२-३० ) एवं शिल्परत्न ( पूर्व. अ. ३७ ) में प्राप्त होता है २. मकरतोरण ( श्लोक ५० ) मकरतोरण का उल्लेख शिल्परत्न ( पू. अ.-२३.१२-१३ ) में प्राप्त होता है, जो इस प्रकार है— पञ्चवक्त्रसमायुक्तं पार्श्वयोर्मकरास्यकम्। मध्ये पूरिमसंयुक्तं नानाचित्रसमन्वितम्।। नानालङ्कारसंयुक्तं यत्तन्मकरतोरणम्। देवद्विजनृपाणां तु शस्तं मकरतोरणम्।। यह तोरण देवालय एवं ब्राह्मणों के गृह के अनुकूल कहा गया है।