मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२९० मयमतम् ✵ द्वात्रिंशत् परिवाराः ✵ द्वात्रिंशत्परिवाराः स्थण्डिलकाख्ये तु चण्डिते स्थाप्याः ॥४५॥ ब्रह्मपदं नवबाह्यो श्रीज्येष्ठोमा सरस्वती चैताः। साविन्द्रेन्द्रजयांशे रुद्रजये चापवत्से च ॥४६॥ आर्यादिषु च पदेषु वृषभाद्याः पूर्ववत् कथिताः । बत्तीस परिवार-देवता—स्थण्डिल वास्तुपद पर बत्तीस परिवारदेवता स्थापित किये जाते हैं। ब्रह्मा के पद के बाहर नौ पदों पर श्री, ज्येष्ठा, उमा एवं सरस्वती को क्रमशः साविन्द्र, इन्द्रजय, रुद्रजय एवं आपवत्स के पद पर रखना चाहिये। आर्यक आदि के पद पर वृषभ आदि देवों को पहले की भाँति स्थापित करना चाहिये। ईशे पर्जन्यपदे माहेन्द्रे भानुभागे तु ॥४७॥ सत्यान्तरिक्षकानलपूषगृहक्षतार्किभागे तु। गन्धर्वे मृषभागे पितृबोधनपुष्पदन्तवरुणेषु ॥४८॥ असुरे यक्षसमीरणभागे नागे च भल्लाटे । सोमपदे मृगभागेऽप्युदितौ देवाः क्रमात्स्थाप्याः ॥४९॥ ईशशशिनन्दिकेश्वरसुरपतयो वै महाकालः । निकरवह्निबृहस्पतिगजवदनयमाश्च भिङ्गिरिटिः ॥५०॥ चामुण्डाप्यथ निर्ऋतिश्चागस्त्यो विश्वकर्मा च। जलपतिरथ भृगुनामा दक्षः प्रजापतिर्वायुः ॥५१॥ दुर्गा च वीरभद्रो धनदश्चण्डेश्वरः शुक्रः । स्थण्डिलचण्डितभागे पण्डितजनमण्डलैरुदिताः ॥५२॥ ईश, पर्जन्य, महेन्द्र, सूर्य, सत्य, अन्तरिक्ष, अनल, पूषा, गृहक्षत, यम, गन्धर्व, मृष, पितृ, बोधन, पुष्पदन्त, वरुण, यक्ष, समीरण, नाग, भल्लाट, सोम, मृग एवं उदिति के पद पर क्रमशः देवों की स्थापना करनी चाहिये। (ये देवता हैं— ) ईश, शशि, नन्दिकेश्वर, सुरपति, महाकाल, दिनकर, वह्नि, बृहस्पति, गजवदन, यम, भृङ्गरीटि, चामुण्डा, निर्ऋति, अगस्त्य, विश्वकर्मा, जलपति, भृगु, दक्ष प्रजापति, वायु, दुर्गा, वीरभद्र, धनद, चण्डेश्वर एवं शुक्र। विद्वानों के कथनानुसार स्थण्डिल वास्तु-विभाग में यह व्यवस्था होनी चाहिये ।।४७-५२।। युग्मायुग्मपदे ते कुड्यगता वागताश्च परमध्ये । त्रिप्राकारे पञ्चप्राकारेऽप्येवमेव भवेत् ॥५३॥