मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८ मयमतम् भूमि उत्तम, यदि गड्ढा भी न भरे एवं मिट्टी समाप्त हो जाय अर्थात् मिट्टी गड्ढा भरने में कम पड़े तो भूमि हीन कोटि की होती है। उस गड्ढे के मध्य में यदि जल दाहिनी ओर घूम कर बहे तो इस प्रकार की सुरभि की मूर्ति के सदृश वाली भूमि सर्वसम्पत्ति- कारक होती है।।१९८।। एवं यथोक्तविधिना विविधं विदित्वा ग्रामाग्रहारपुरपत्तनखर्वटानि । स्थानीयखेटनिगमानि तथेतराणि यः संविविक्षुरवनीग्रहणं विदध्यात् ।।१९९।। इति मयमते वस्तुशास्त्रे भूपरिग्रहो नाम चतुर्थोऽध्यायः इसे निर्माण-हेतु ग्रहण करना चाहिये। इस प्रकार पूर्वोक्त विधि से विविध प्रकार की भूमियों का ज्ञान कर व्यक्ति को ग्राम, अग्रहार, पुर, पत्तन, खर्वट, स्थानीय, खेट, निगम एवं अन्य की स्थापना के लिये भूमि का ग्रहण करना चाहिये।।१९९।।