मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६ मयमतम् आयाधिकमथ सुखदं व्ययमधिकं सर्वनाशं स्यात् । विपरीते तु विपत्त्यै तस्मात् सम्यक् परीक्ष्य कर्तव्यम् ॥२४॥ आय का अधिक होना सुखदायक होता है एवं व्यय का अधिक होना नाश का कारण होता है। इसके विपरीत होना विपत्तिकारक होता है। अतः भली-भाँति इसकी परीक्षा करने के पश्चात् ही कार्य करना चाहिये॥२४॥ ✱ विप्रसंख्या ✱ द्वादशसहस्रविप्रैर्यत्रिष्ठितमुत्तमोत्तमं ग्रामम् । दशसाहस्रैर्मध्यममध्यमं स्यादष्टसाहस्रैः ॥२५॥ ब्राह्मणों की संख्या — सर्वश्रेष्ठ ग्राम वह है, जहाँ बारह हजार ब्राह्मण हों। मध्यम ग्राम में दस हजार तथा छोटे ग्राम में आठ हजार ब्राह्मण होते हैं॥२५॥ सप्तसहस्रैर्विप्रैर्मध्यमोत्तममित्यभीष्टं स्यात् । षट्सहस्रैर्मध्यममध्यमं तु पञ्चसाहस्रैः ॥२६॥ सात हजार ब्राह्मण मध्यमोत्तम ग्राम में होते हैं। छः हजार ब्राह्मण मध्यम-