मयमतम् (मय मुनि प्रणीत वास्तुशास्त्र - डॉ. शैलजा पाण्डेय सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Mayamatam of Maya Muni with Hindi Commentary by Shailaja Pandey
मय मुनि (टीकाकार: डॉ. शैलजा पाण्डेय) द्वारा
पञ्चविंशोऽध्यायः 卐 मण्डपसभाविधानम् ३७१ वामे भागे दक्षिणे वा नृपाणां त्रेधा कार्या वाटिका क्रीडनार्थम्। एकद्वित्रिदण्डसंख्याशतं स्यान्मध्ये धारामण्डपं तोययन्त्रैः ।। ( राजवल्लभमण्डन-९.१८ ) जलयन्त्र की स्थापना के लिये भद्र, जलवापी, वेदिका, कोणों में कूप एवं मध्य में बारह स्तम्भ होते हैं— क्षेत्रं सप्तविभागभाजितमतो भद्रं च भागत्रयं तन्मध्ये जलवापिका जिनपदैरेकांशतो वेदिका। स्तम्भैर्द्वादशभिश्च मध्यरचितः कोणेषु कूपान्वितः कर्तव्यो जलयन्त्र एष विधिवद् भोगाय पृथ्वीभुजाम् ।। ( राजवल्लभमण्डन-९.१९ ) जलयन्त्र एवं धारा-मण्डप का वर्णन अपराजितपृच्छा (अ.-८८-९९) में विस्तार से प्राप्त होता है। अलिन्द्र ( श्लोक १९३ ) ग्रन्थ में वर्णित 'अलिन्द्र' सम्भवतः अन्य वास्तुग्रन्थों में वर्णित अलिन्द है, जिसे ओसारा या बरामदा कहा जाता है।